Punjab News: मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब में अब तक 1 लाख मुफ्त डायलिसिस

भारत में क्रोनिक किडनी डिजीज (गंभीर गुर्दा रोग) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में सरकार द्वारा समर्थित कैशलेस डायलिसिस योजनाएँ मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही हैं।

Muskaan Dogra
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Punjab Health and Family Welfare Minister Dr. Balbir Singh
Highlights
  • योजना के तहत अब तक 1 लाख मुफ्त डायलिसिस
  • मरीजों के लिए कैशलेस उपचार जीवनरक्षक
  • मरीजों का इलाज बीच में न रुकने की सुविधा
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत अब तक लगभग 1 लाख डायलिसिस प्रक्रियाएँ की जा चुकी हैं, जिन पर करीब 16.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

भारत में क्रोनिक किडनी डिजीज (गंभीर गुर्दा रोग) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में सरकार द्वारा समर्थित कैशलेस डायलिसिस योजनाएँ मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि उपचार की सफलता अभी भी इलाज की उपलब्धता से अधिक उसे वहन करने की क्षमता पर निर्भर करती है।

आर्थिक सहायता से काफी राहत मिली

लुधियाना (Ludhiana) के ध्यान सिंह सप्ताह में दो बार अस्पताल जाते हैं। लंबे समय से डायलिसिस करवा रहे मरीजों की तरह उन्हें भी नियमित उपचार के बावजूद कई शारीरिक और मेटाबोलिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि ‘सेहत कार्ड’ के माध्यम से मिल रही आर्थिक सहायता से उन्हें काफी राहत मिली है। अब तक वे दर्जन से अधिक बार कैशलेस इलाज ले चुके हैं।

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क्रोनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवन दिनों या हफ्तों में नहीं, बल्कि मशीन के चक्रों में सिमट जाता है। सप्ताह में दो से तीन बार, लगभग चार घंटे के लिए, शरीर से खून निकालकर डायलिसिस मशीन के माध्यम से फिल्टर किया जाता है और फिर उसे उन विषैले तत्वों से साफ करके वापस शरीर में डाला जाता है, जिन्हें खराब हो चुकी किडनियाँ अब बाहर नहीं निकाल पातीं।

क्रोनिक किडनी डिजीज एक गंभीर समस्या

यह प्रक्रिया जीवन को जारी रखती है, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ नहीं बनाती। भारत में क्रोनिक किडनी डिजीज एक गंभीर जन-स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जिसका सीधा संबंध डायबिटीज और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के बढ़ते मामलों से है।

Bhagwant Mann
Bhagwant Mann

जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हर साल लाखों मरीज एंड-स्टेज किडनी डिजीज के साथ उपचार के लिए पहुंचते हैं, जहाँ जीवित रहने के लिए लंबे समय तक डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है। वैश्विक स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इसे तेजी से बढ़ रही गैर-संचारी बीमारियों में शामिल करता है, जिसका कारण बढ़ती उम्र और जीवनशैली से जुड़े जोखिम हैं। भारत में यह संकट उपचार के खर्च के कारण और भी गंभीर हो जाता है।

अधिकांश परिवारों के लिए कठिन

निजी क्षेत्र में एक डायलिसिस सत्र की लागत 1,500 से 4,000 रुपये के बीच होती है। अधिकांश मरीजों को सप्ताह में दो से तीन डायलिसिस सत्रों की आवश्यकता होती है, जिससे वार्षिक खर्च कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है—जो निरंतर आर्थिक सहायता के बिना अधिकांश परिवारों के लिए कठिन है। उपचार का निर्णय अक्सर चिकित्सा आवश्यकता के साथ-साथ आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करता है।

इस संदर्भ में पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ जैसी सरकारी योजनाएँ उपचार में आने वाली बाधाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अधिकांश मामलों में किडनी की बीमारी कई दीर्घकालिक रोगों का परिणाम होती है, जो वर्षों तक चुपचाप गुर्दों को नुकसान पहुँचाते रहते हैं और लक्षण देर से सामने आते हैं। इस योजना के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों का जेब से होने वाला खर्च कम हुआ है और वे इलाज बीच में छोड़ने से बच रहे हैं।

1 लाख मुफ्त डायलिसिस

इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “अब तक स्वास्थ्य योजना के तहत 1 लाख मुफ्त डायलिसिस उपचार, जिनकी लागत 16.5 करोड़ रुपये है, प्रदान किए जा चुके हैं। यह हमारा कर्तव्य है कि कोई भी मरीज पैसों की कमी के कारण डायलिसिस से वंचित न रहे।”

मोगा के दिल्ली हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सौरव गोयल का कहना है कि डायलिसिस में आर्थिक सहायता का प्रभाव केवल सुविधा तक सीमित नहीं है। वे बताते हैं, “डायलिसिस इलाज नहीं, बल्कि जीवन को बनाए रखने वाली प्रक्रिया है। यदि मरीज एक या दो सत्र भी छोड़ दे, तो शरीर में विषैले तत्व तेजी से जमा हो जाते हैं, जो जानलेवा हो सकते हैं। कैशलेस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इलाज में निरंतरता बनी रहती है, और डायलिसिस में निरंतरता ही जीवन है।”

कैशलेस उपचार के अंतर्गत

अपना अनुभव साझा करते हुए वे कहते हैं, “अब हम पहले की तुलना में हर महीने अधिक डायलिसिस सत्र कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश कैशलेस उपचार के अंतर्गत होते हैं। यह मरीजों के लिए बड़ी मदद और डॉक्टरों के लिए भी राहत की बात है, क्योंकि इससे आर्थिक कारणों से इलाज रुकने की समस्या लगातार कम हो रही है।”





















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मुस्कान डोगरा, डेली संवाद ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे क्राइम, राजनीति और लोकल खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। वह 4 सालों से अधिक समय से Daily Samvad (Digital) में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत डेली संवाद से की। उन्होंने हरियाणा के महर्षि दयानंद युनिवर्सिटी से मास कॉम्यूनिकेशन की डिग्री हासिल की है।
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