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Jalandhar News: पंजाब सरकार की बड़ी कार्रवाई, जालंधर के दो अफसरों को किया सस्पैंड, जाने वजह

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डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: पंजाब सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जालंधर के दो अफसरो को सस्पैंड कर दिया है। सस्पैंड किए गए दोनों अफसर फूल सप्लाई डिपार्टमेंट के बताए जा रहे हैं। जेएस फार्म में सरकारी गेहूं के कथित गबन और खराब होने के मामले में फूड सप्लाई विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो इंस्पेक्टरों को सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंड किए गए इंस्पेक्टरों की पहचान अनिल और प्रवीण सल्लण के रूप में हुई है, जो करतारपुर क्षेत्र में तैनात थे। जानकारी के मुताबिक जालंधर (Jalandhar) में सस्पैंड किए दोनों इंस्पैक्टरों पर समस्तपुर स्थित जेएस फार्म में रखी करोड़ों रुपये की सरकारी गेहूं की सुरक्षा और रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप हैं। जिला फूड कंट्रोलर (DFSC) नरेंद्र सिंह ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

काफी समय से विवाद चल रहा था

जानकारी के अनुसार, जालंधर (Jalandhar) के थाना मकसूदां के अंतर्गत आने वाले जेएस फार्म में सरकारी गेहूं के भंडारण को लेकर पिछले काफी समय से विवाद चल रहा था। आरोप लगाए जा रहे थे कि गोदाम में रखी करोड़ों रुपये की सरकारी गेहूं या तो रखरखाव के अभाव में खराब हो गई या फिर उसमें बड़े स्तर पर गबन किया गया। मामले के सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया था।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए फूड सप्लाई विभाग के उच्च अधिकारी जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। जांच के दौरान अधिकारियों को काफी विरोध का सामना भी करना पड़ा। शुरुआत में विभाग ने जेएस फार्म के मालिक उपकार सिंह होठी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें मामले का जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। इंस्पेक्टर प्रवीण सल्लण के बयानों के आधार पर पुलिस ने फार्म मालिक के खिलाफ मामला भी दर्ज किया था।

विभागीय जांच में कई अहम तथ्य

हालांकि बाद में हुई आंतरिक विभागीय जांच में कई अहम तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि फार्म में रखी सरकारी गेहूं की देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल फार्म मालिक की नहीं, बल्कि वहां तैनात फूड सप्लाई विभाग के अधिकारियों और इंस्पेक्टरों की भी थी। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि संबंधित इंस्पेक्टरों ने समय-समय पर स्टॉक की जांच और रखरखाव की जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं निभाया, जिसके कारण सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी गेहूं के भंडारण के दौरान नियमित रूप से निरीक्षण करना, स्टॉक की जांच करना और खराब होने से बचाने के लिए जरूरी प्रबंध करना संबंधित इंस्पेक्टरों की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। लेकिन इस मामले में दोनों इंस्पेक्टर अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहे। इसी आधार पर विभाग ने तत्काल प्रभाव से दोनों को निलंबित करने का फैसला लिया।

विवादों के घेरे में आ गया

वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले को लेकर फूड सप्लाई विभाग खुद भी विवादों के घेरे में आ गया है। सूत्रों के अनुसार, पनग्रेन ने जेएस फार्म के साथ किसी प्रकार का औपचारिक लिखित समझौता तक नहीं किया था। इतना ही नहीं, पिछले करीब 11 महीनों से फार्म का किराया भी नहीं चुकाया गया था, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी निजी फार्म हाउस की भूमिका केवल भंडारण के लिए स्थान उपलब्ध कराने तक सीमित होती है। वहां रखे अनाज की सुरक्षा, देखभाल और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी फूड सप्लाई विभाग की होती है। विभाग की ओर से वहां सुरक्षा गार्ड तो तैनात किए गए थे, लेकिन गेहूं के उचित रखरखाव के लिए जरूरी व्यवस्थाएं नहीं की गईं।

कई अन्य के नाम आ सकते हैं

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मामला अभी और गहरा सकता है और आने वाले समय में कई अन्य अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल दो इंस्पेक्टरों को सस्पेंड कर विभाग अपनी छवि सुधारने की कोशिश करता नजर आ रहा है, लेकिन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज होती जा रही है। इस मामले में कई नेता और अफसर लपेटे में आ सकते हैं।