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Jalandhar News: जालंधर के रतन अस्पताल के डाक्टरों पर लगे गंभीर आरोप, अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा

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डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: जालंधर में स्थित रतन अस्पताल एक बार फिर विवादों में आ गया है, जहां एक बुजुर्ग महिला मरीज के इलाज को लेकर परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच गंभीर आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। मामला इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में हंगामा मच गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। जानकारी के अनुसार, मरीज गुरदेव कौर के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ ही समय बाद स्थिति अचानक बिगड़ गई और उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने Ayushman Bharat Yojana के तहत इलाज की बात की, तो अस्पताल का रवैया बदल गया। उनका दावा है कि मरीज पहले सामान्य स्थिति में थीं और बातचीत कर रही थीं, यहां तक कि उन्होंने खाने की इच्छा भी जताई थी।

इलाज के नाम पर पैसों की मांग

जालंधर (Jalandhar) में अस्पताल के बाहर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल लगातार इलाज के नाम पर पैसों की मांग कर रहा था। उनके अनुसार, जैसे ही उन्होंने आयुष्मान कार्ड का उपयोग करने की बात कही, कुछ ही मिनटों के भीतर मरीज को अचानक वेंटिलेटर पर डाल दिया गया। परिवार का आरोप है कि यह सब पैसे वसूलने या सरकारी योजना से बचने के लिए किया गया।

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वहीं दूसरी ओर, अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) नरिंदर कुमार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मरीज की हालत पहले से ही बेहद गंभीर थी और उन्हें जालंधर के कई अस्पतालों से रेफर किया गया था। अस्पताल के मुताबिक, मरीज के दिल से संबंधित जांच में NT-proBNP स्तर लगभग 35,000 पाया गया, जो सामान्य स्तर से कई गुना अधिक है और गंभीर हृदय समस्या का संकेत देता है। [caption id="attachment_108079" align="aligncenter" width="1200"] Jalandhar Hospital Controversy News Jalandhar Hospital Controversy News[/caption]

अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मरीज को कार्डियक अरेस्ट आया था और उनका इलाज मेडिकल स्थिति के अनुसार ही किया जा रहा था। PRO ने कहा कि इलाज को लेकर लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं और अस्पताल ने किसी प्रकार की लापरवाही या गलत मंशा से कोई कार्य नहीं किया है। इस बीच, मरीज के परिजन अमरीक सिंह ने भी अस्पताल पर लापरवाही और पैसों की अधिक मांग के आरोप दोहराए हैं। उनका कहना है कि अभी तक मरीज को केवल शुरुआती इलाज दिया गया है, जबकि लगातार भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है।