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Jalandhar: जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की जमीन पर बावा बिल्डिंग मैटेरियल्स का कब्जा अवैध, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, EO बोले- जमीन को कब्जामुक्त कराएंगे

जालंधर में करोड़ों की ट्रस्ट जमीन पर अवैध कब्जे पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बावा बिल्डिंग मैटेरियल्स की अपील खारिज, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट जल्द खाली करवाएगा 1 कनाल सरकारी जमीन

Jalandhar:  जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की जमीन पर बावा बिल्डिंग मैटेरियल्स का कब्जा अवैध, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,  EO बोले- जमीन को कब्जामुक्त कराएंगे
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डेली संवाद, चंडीगढ़/जालंधर। Jalandhar Improvement Trust High Court Judgment: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जालंधर के चर्चित बावा बिल्डिंग मैटेरियल्स बनाम जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बावा बिल्डिंग मैटेरियल्स की दूसरी अपील (RSA-3736-2017) को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल ने 21 जुलाई 2026 को सुनाए फैसले में कहा कि संबंधित पक्ष सार्वजनिक संपत्ति पर अनधिकृत कब्जे में था और उसने कानूनी प्रक्रिया में हुई देरी का अनुचित लाभ उठाया।

अदालत ने माना कि जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने अपनी 110 एकड़ विकास योजना के तहत अधिग्रहित भूमि पर अपना अधिकार साबित किया है। वहीं बावा बिल्डिंग मैटेरियल्स यह साबित नहीं कर सका कि उसका कब्जा वैध या अधिकृत था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपीलीय अदालत के फैसलों को सही ठहराते हुए कहा कि कब्जाधारियों ने सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से निर्माण और व्यवसाय किया।

पहले भी लग चुकी थीं कड़ी टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में वर्ष 2024 में इसी विवाद से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें अदालत ने कहा था कि कब्जे के समर्थन में पेश किए गए कई साक्ष्य मुकदमा दायर होने के बाद तैयार किए गए थे और यह सार्वजनिक संस्था की जमीन पर दावा करने के लिए की गई हेराफेरी को दर्शाता है। उस फैसले में यह भी कहा गया था कि जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग कर भी कब्जा हटाने का अधिकार रखता है।

10 हजार रुपये प्रतिमाह मेस्ने प्रॉफिट भी बरकरार

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि ट्रस्ट द्वारा मांगा गया 10,000 रुपये प्रतिमाह मेस्ने प्रॉफिट (अवैध कब्जे की अवधि का उपयोग शुल्क) उचित है। अदालत ने कहा कि विवादित भूमि लंबे समय से कब्जे में थी और वहां से बिल्डिंग मैटेरियल्स का कारोबार तथा कार बाजार भी संचालित किया जा रहा था। ऐसे में यह राशि किसी भी दृष्टि से अधिक नहीं मानी जा सकती।

अदालत ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपीलीय अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सही निष्कर्ष निकाला है। भूमि पर ट्रस्ट के स्वामित्व को लेकर कोई संदेह नहीं था, इसलिए कब्जा वापस लेने के लिए अनिवार्य निषेधाज्ञा (Mandatory Injunction) का मुकदमा भी पूरी तरह वैध था। अदालत ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए बावा बिल्डिंग मैटेरियल्स की अपील निरस्त कर दी और लंबित सभी आवेदन भी समाप्त कर दिए।

जल्द खाली करवाएंगे जमीन - EO

जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के ईओ राजेश चौधरी ने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप जल्द ही सरकारी जमीन पर हुए कब्जे को खाली करवाया जाएगा। चौधरी ने कहा कि बावा बिल्डिंग मैटेरियल्स के करीब 1 कनाल सरकारी जमीन पर कब्जा किया है, जिसे अब खाली करवाया जाएगा।