डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को ई-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ई-20 पेट्रोल को बिना पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन और व्यापक सलाह-मशवरे के देशभर में लागू किया गया है। उन्होंने दावा किया कि इससे वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में स्वीकार किया है कि ई-20 पेट्रोल से वाहनों की माइलेज प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद इस ईंधन को तेजी से लागू किया गया। उनके अनुसार, एक सर्वेक्षण में 67 प्रतिशत वाहन मालिकों ने माइलेज घटने और 45 प्रतिशत ने इंजन संबंधी समस्याओं की शिकायत दर्ज कराई है।
पसंद का विकल्प दिया जाए
इसी मुद्दे पर पंजाब विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मांग की कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 पेट्रोल में से अपनी पसंद का विकल्प दिया जाए। साथ ही ई-20 पेट्रोल की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखने की भी मांग की गई।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि ई-20 नीति के पीछे अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से बड़े पैमाने पर इथेनॉल आयात करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि इस नीति को वर्ष 2030 के बजाय 2026 में लागू करने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई।
बैंक ऋण लेकर वाहन खरीदते हैं
मान ने यह भी कहा कि आम लोग वर्षों की बचत और बैंक ऋण लेकर वाहन खरीदते हैं। यदि नई ईंधन नीति के कारण उन्हें इंजन की मरम्मत या माइलेज में कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो इसका सीधा आर्थिक बोझ जनता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले उसके प्रभावों का व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण कराना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को पत्र लिखकर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी जरूरत के अनुसार शुद्ध पेट्रोल या ई-20 पेट्रोल चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय
विधानसभा में हुई चर्चा के बाद पारित प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया है। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की नीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।