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Jalandhar News: पश्चिमी कमान ने मनाया 80वाँ स्थापना दिवस

रतीय सेना की पश्चिमी कमान ने 15 सितंबर 2026 को चंडीमंदिर में अपना 80वाँ स्थापना दिवस मनाया, जो राष्ट्र की रक्षा में आठ दशकों की गौरवशाली सेवा, शौर्य और बलिदान का प्रतीक है। Western Command, 80th Raising Day

Jalandhar News: पश्चिमी कमान ने मनाया 80वाँ स्थापना दिवस
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डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने 15 सितंबर 2026 को चंडीमंदिर में अपना 80वाँ स्थापना दिवस मनाया, जो राष्ट्र की रक्षा में आठ दशकों की गौरवशाली सेवा, शौर्य और बलिदान का प्रतीक है।

इस गरिमामयी अवसर पर पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह, एवीएसएम, एसएम** ने वीर स्मृति युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीरगति को प्राप्त हुए वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

गौरवशाली विरासत को समृद्ध किया

जनरल वीपी मलिक, पीवीएसएम, एवीएसएम (सेवानिवृत्त), पूर्व सेनाध्यक्ष ने भी पुष्पचक्र अर्पित कर उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिनके सर्वोच्च बलिदान ने कमान की गौरवशाली विरासत को समृद्ध किया है। पश्चिमी कमान की उत्पत्ति 1905 के किचनर सुधारों के अंतर्गत भारतीय सेना के पुनर्गठन से जुड़ी है।

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स्वतंत्रता और विभाजन के पश्चात, तत्कालीन उत्तरी सेना के पूर्वी भाग को सितंबर 1947 में दिल्ली एवं पूर्वी पंजाब कमान के रूप में पुनर्गठित किया गया, जो बाद में जनवरी 1948 में पश्चिमी कमान के रूप में विकसित हुआ। तब से कमान ने 1947-48, 1962, 1965 और 1971 के युद्धों सहित अनेक बाद के अभियानों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

इसकी स्थायी विरासत को कायम रखते

हाल ही में, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी कमान ने पश्चिमी मोर्चे पर सौंपे गए कार्यों के प्रभावी निष्पादन में उत्कृष्ट परिचालन तत्परता, व्यावसायिकता और संयुक्त समन्वय का प्रदर्शन किया। वर्ष 2025 में ऑपरेशन राहत के दौरान भी कमान की यह दृढ़ प्रतिबद्धता दिखाई दी, जब प्रभावित समुदायों को समय पर बचाव, राहत और सहायता प्रदान करने के लिए कमान ने अपने संसाधनों को तेजी से सक्रिय किया।

ये सभी ऑपरेशन परिचालन में निर्णायक और सेवा में संवेदनशील बने रहने की कमान की क्षमता को दर्शाते हैं तथा राष्ट्र के प्रति शौर्य, बलिदान और सेवा की इसकी स्थायी विरासत को कायम रखते हैं।

सेना की सर्वोच्च परंपराओं के प्रतीक

पश्चिमी कमान के इतिहास के पन्ने असाधारण साहस, कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के प्रमाण हैं। इसके वीर योद्धाओं ने असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए 11 परमवीर चक्र, एक अशोक चक्र और 143 महावीर चक्र सहित अनेक अन्य वीरता एवं विशिष्ट सेवा पुरस्कार अर्जित किए हैं। ये सम्मान भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं के प्रतीक हैं और सैनिकों की भावी पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करते हैं।

दशकों के दौरान, पश्चिमी कमान ने स्वयं को क्रमशः एक आधुनिक, चुस्त, प्रौद्योगिकी-सक्षम और युद्ध के लिए सदैव तैयार बल के रूप में परिवर्तित किया है, जो युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में सक्षम है।

सतत परिचालन तैयारियों पर आधारित

इसकी निरंतर प्रगति क्षमता संवर्धन, प्रौद्योगिकी के समावेशन, नवाचार, संयुक्तता, यथार्थपरक प्रशिक्षण, सुदृढ़ अवसंरचना और सतत परिचालन तैयारियों पर आधारित है।

अपनी समृद्ध विरासत से शक्ति प्राप्त करते हुए और भविष्य की परिचालन चुनौतियों पर दृढ़ता से केंद्रित रहते हुए, पश्चिमी कमान राष्ट्र की पश्चिमी सीमाओं की रक्षा के लिए सदैव अडिग और प्रतिबद्ध है।