डेली संवाद, नई दिल्ली। Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: बॉलीवुड अभिनेता और जाने-माने हास्य कलाकार राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता को रकम जमा करने के लिए आखिरी बार दो हफ्ते का समय दिया है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राजपाल यादव को कम से कम 2 करोड़ रुपए सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने होंगे। साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट भी कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई की। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। कोर्ट ने राजपाल यादव को अगली सुनवाई तक सरेंडर करने से मिली राहत जारी रखी है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
यह आखिरी मौका है
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजपाल यादव (Rajpal Yadav) के पिछले आचरण को लेकर कड़ी टिप्पणी की। CJI सूर्यकांत ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है और ऐसे में अभिनेता पर भरोसा करना मुश्किल है।
अदालत ने टिप्पणी की कि राजपाल यादव बॉलीवुड में अभिनय और ड्रामा करने के लिए जाने जाते हैं और उम्मीद है कि कोर्ट के सामने भी ऐसा नहीं हो रहा है। यह टिप्पणी अदालत द्वारा उनकी ओर से पहले किए गए भुगतान संबंधी वादों के पालन को लेकर जताई गई नाराजगी के संदर्भ में थी।
वकील ने मांगा था दो हफ्ते का समय
राजपाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पाटवालिया सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि अभिनेता फिलहाल आवश्यक रकम जुटाने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन विवाद को निपटाना चाहते हैं।
वकील ने बताया कि राजपाल यादव और उनकी मां के पास कुछ संपत्तियां हैं। इन्हें बेचकर रकम जुटाने की कोशिश की जाएगी। इसी आधार पर अदालत से दो सप्ताह का समय मांगा गया।
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वकील ने आश्वासन दिया कि इस अवधि में कम से कम 2 करोड़ रुपए की रकम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा की जाएगी और बाकी बकाया रकम के भुगतान के लिए ठोस प्रस्ताव पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए इसे अंतिम अवसर के तौर पर दो सप्ताह का समय दिया।
पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने का भी निर्देश दिया है। वहीं, अभिनेता को फिलहाल सरेंडर करने से मिली राहत को 5 अक्टूबर तक जारी रखा गया है।
इसका मतलब है कि अगली सुनवाई तक उन्हें तत्काल सरेंडर करने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन अदालत द्वारा तय वित्तीय शर्तों का पालन करना होगा।
2010 से शुरू हुआ था विवाद
राजपाल यादव से जुड़ा यह वित्तीय विवाद करीब 16 साल पुराना है। मामला वर्ष 2010 का है, जब अभिनेता ने अपनी पहली फिल्म बतौर निर्देशक बनाने के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता ली थी।
राजपाल यादव की निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' 2012 में रिलीज हुई थी। फिल्म के अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने के बाद लोन की रकम चुकाने में परेशानी हुई। समय के साथ ब्याज और अन्य देनदारियों के कारण विवादित रकम काफी बढ़ गई। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
सात चेक हुए थे बाउंस
विवाद के दौरान राजपाल यादव की ओर से जारी किए गए चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए। इसके बाद Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत सात अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गईं। मामला आगे बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिशें भी हुईं।
रिपोर्टों के मुताबिक 2013 में एक समझौते के तहत करीब 10.40 करोड़ रुपए में मामले को निपटाने पर सहमति बनी थी और कुछ रकम पहले ही भुगतान किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद भुगतान को लेकर विवाद जारी रहा और चेक बाउंस से जुड़े मुकदमे आगे बढ़ते रहे।
2018 में ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा
मामले में अप्रैल 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को सातों चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराया था। शुरुआती तौर पर उन्हें प्रत्येक मामले में छह महीने की सजा और जुर्माने का आदेश दिया गया था।
बाद में सजा में बदलाव किया गया। 22 मई 2019 को उन्हें सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट में भी राहत नहीं
राजपाल यादव ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी। सेशंस कोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा और तीन महीने की सजा तथा जुर्माने को कायम रखा।
इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। 10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा में दखल देने से इनकार कर दिया। इसके बाद राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने दी थी अंतरिम राहत
8 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें फिलहाल सरेंडर करने से राहत दी थी। यह राहत अदालत में रकम जमा करने की शर्त से जुड़ी थी।
15 सितंबर की सुनवाई में उनके वकील ने रकम जुटाने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह की अंतिम मोहलत देते हुए कम से कम 2 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को तय की।
अब 5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
अब राजपाल यादव को अगली सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपए जमा करने और भुगतान का ठोस प्रस्ताव पेश करने की चुनौती है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह उन्हें दिया गया अंतिम अवसर है।
5 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि दिए गए निर्देशों का कितना पालन हुआ और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जानी है।
Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को 2 करोड़ रुपए जमा करने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया।
रकम सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी।
अभिनेता को पासपोर्ट सरेंडर करने का निर्देश दिया गया।
अगली सुनवाई तक सरेंडर से मिली राहत जारी रहेगी।
अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
मामला मुरली प्रोजेक्ट्स से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों का है।
विवाद की शुरुआत 2010 में फिल्म बनाने के लिए लिए गए करीब 5 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता से हुई थी।
2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा में दखल देने से इनकार किया था।