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Punjab News: अमन अरोड़ा का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, बोले- भारत में संस्थाओं की विश्वसनीयता गंभीर संकट में

भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रधान अमन अरोड़ा ने आज कहा कि भारत का चुनावी लोकतांत्रिक ढांचा पिछले कई दशकों के अपने ‘सबसे गंभीर संस्थागत संकट’ का सामना कर रहा है।

Punjab News: अमन अरोड़ा का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, बोले- भारत में संस्थाओं की विश्वसनीयता गंभीर संकट में
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रधान अमन अरोड़ा ने आज कहा कि भारत का चुनावी लोकतांत्रिक ढांचा पिछले कई दशकों के अपने ‘सबसे गंभीर संस्थागत संकट’ का सामना कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की स्वायत्तता को सुनियोजित तरीके से समाप्त किया गया है और देश को ‘निर्वाचित तानाशाही’ की ओर धकेला जा रहा है।

पंजाब विधानसभा में पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग करने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए श्री अमन अरोड़ा ने पंजाब के उन स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की आजादी और मतदान के अधिकार के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। मतदान के अधिकार में समानता के संबंध में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक नागरिकता का मूल आधार है।

यह मामला केवल ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं

अमन अरोड़ा ने कहा कि यह संकट किसी एक चुनाव आयुक्त तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि दो चुनाव आयुक्तों ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही और उनके असहमति संबंधी विचारों को बार-बार नजरअंदाज किया जा रहा है। ईवीएम और चुनाव आयोग के कामकाज पर उठ रहे सवालों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में युवाओं द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि चुनाव प्रक्रिया के प्रति लोगों का विश्वास दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है।

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अमन अरोड़ा ने कहा, ‘‘यह मामला केवल ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है। भविष्य में इस पद पर जो भी आएगा, उसे इसी ढांचे के भीतर रहकर काम करना पड़ेगा, क्योंकि यह सब कुछ सत्ता में बैठे लोगों के इशारे पर ही हो रहा है।’’ उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता के बल पर कायम नहीं रहता, बल्कि ईमानदारी और निष्पक्षता के कारण ही बरकरार रहता है।

राष्ट्रीय संस्थाओं के लिए एक बड़ी क्षति

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों का उल्लेख करते हुए श्री अमन अरोड़ा ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन को याद किया। उन्होंने कहा कि शेषन ने 1995 में बिहार में बड़े पैमाने पर बूथ कैप्चरिंग की घटनाओं के कारण तत्कालीन सरकार के दबाव के बावजूद वहां चुनाव तब तक स्थगित करवा दिए थे, जब तक भारी संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती नहीं कर दी गई।

इसी तरह उन्होंने पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का भी उल्लेख किया, जिन्होंने 2018-19 के दौरान प्रधानमंत्री के भाषणों पर आपत्ति जताई थी और बाद में एशियाई विकास बैंक में उपाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के लिए देश छोड़ दिया था। उन्होंने ऐसे अधिकारियों का देश छोड़कर जाना राष्ट्रीय संस्थाओं के लिए एक बड़ी क्षति बताया।

चयन कमेटी का पुनर्गठन किया गया

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून पर निशाना साधते हुए अरोड़ा ने कहा कि चयन कमेटी का पुनर्गठन किया गया है। पहले इस कमेटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे, लेकिन अब मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल कर दिया गया है, जिससे विपक्ष के नेता कमेटी में अल्पमत में रह गए हैं। उन्होंने उस प्रावधान की ओर भी ध्यान दिलाया, जो चयन कमेटी को ‘खोज कमेटी’ के माध्यम से चुने गए उम्मीदवारों के अलावा ‘किसी अन्य व्यक्ति’ के नाम पर विचार करने की अनुमति देता है।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था ऐसी स्थिति पैदा करती है, जिसमें आरोपी ही जांचकर्ता, वकील और न्यायाधीश बन जाता है। उनके अनुसार, इस कानून का अर्थ यह है कि सत्तारूढ़ पार्टी पूरी प्रक्रिया को अपनी इच्छानुसार संचालित कर सकती है, स्वयं गलत काम (अपराध) कर सकती है और अपने मुताबिक फैसला भी सुना सकती है। उन्होंने आगे कहा कि ये कमेटीयां केवल दिखावा मात्र हैं, जबकि वास्तविक शक्तियां सरकार के हाथों में ही रहती हैं।

यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या एक पार्टी की नहीं

स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब के योगदान की याद दिलाते हुए श्री अरोड़ा ने कहा कि अब संविधान की रक्षा करने की जिम्मेदारी एक बार फिर राज्य के लोगों पर आ गई है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता और निष्पक्षता की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा लाए गए प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया।

उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या एक पार्टी की नहीं है। यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ‘आत्मा’ को बचाने की लड़ाई है। यदि इस व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो भविष्य की प्रत्येक सरकार को एक कमजोर और अवसरवादी व्यवस्था के अनुसार काम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। डेढ़ अरब की आबादी वाले देश का अस्तित्व लोगों के उस विश्वास पर टिका हुआ है, जिसका सीधा संबंध लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता से है।’’