डेली संवाद, नई दिल्ली। New Zealand Immigration Rules: न्यूजीलैंड (New Zealand) सरकार द्वारा इमिग्रेशन पॉलिसी में किए गए हालिया बदलावों का असर अब साफ तौर पर भारतीयों, खासकर पंजाब (Punjab) के युवाओं पर देखने को मिल रहा है। पिछले एक हफ्ते में ही पंजाब के दो लोगों को न्यूजीलैंड में एंट्री के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ा, जबकि रिपोर्ट्स में सामने आया है कि करीब 42 फीसदी स्टूडेंट वीजा आवेदन रद्द किए जा रहे हैं। इन सख्त नियमों ने विदेश में पढ़ाई और काम करने का सपना देखने वाले हजारों युवाओं के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
न्यूजीलैंड (New Zealand) सरकार के नए नियमों के तहत वीजा प्रक्रिया को पहले के मुकाबले अधिक सख्त और महंगा बना दिया गया है। स्टूडेंट वीजा फीस में बढ़ोतरी की गई है और अब आवेदकों को अपने बैंक खाते में कम से कम 11.20 लाख रुपए का फंड दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही पढ़ाई पूरी करने के बाद केवल एक बार ही पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट लेने की अनुमति होगी, जिससे बार-बार वीजा लेने की संभावना खत्म हो गई है।
वर्क वीजा के लिए निर्धारित वेतन
इमिग्रेशन नियमों में सबसे बड़ा बदलाव वर्क वीजा के लिए निर्धारित वेतन में किया गया है। 9 मार्च 2026 से औसतन न्यूनतम वेतन को लगभग 1,960 रुपए प्रति घंटा तय किया गया है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि कंपनियां अब कम स्किल वाले कर्मचारियों को नियुक्त करने में हिचकिचा रही हैं। खासकर क्लीनर, ड्राइवर या फैक्ट्री वर्कर जैसी नौकरियों के लिए इतनी सैलरी देना कंपनियों के लिए मुश्किल हो गया है। ऐसे में न केवल नए आवेदकों के लिए अवसर कम हुए हैं, बल्कि पहले से काम कर रहे लोग भी अपने परिवार या रिश्तेदारों को बुलाने में असमर्थ हो रहे हैं।
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ओपन वर्क वीजा पर भी सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। पहले जहां वर्किंग हॉलिडे वीजा धारक अपनी मर्जी से अलग-अलग काम कर सकते थे या छोटा-मोटा बिजनेस शुरू कर लेते थे, अब उन्हें किसी एक कंपनी के साथ ही जुड़कर काम करना होगा। इससे उन लोगों को बड़ा झटका लगा है जो स्वतंत्र रूप से काम करने या खुद का छोटा कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे थे।
अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता
इसके अलावा, अब लो-स्किल जॉब्स के लिए भी अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता लागू कर दी गई है। नैनी, क्लीनर, पेट्रोल पंप वर्कर जैसी नौकरियों के लिए भी अब IELTS जैसे इंग्लिश टेस्ट पास करना जरूरी है। केवल बेसिक अंग्रेजी बोलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही पुराने काम का प्रमाण यानी एक्सपीरियंस लेटर भी देना होगा।
सरकार ने बॉर्डर पर सरप्राइज इंटरव्यू का नियम भी लागू किया है। अब वीजा मिलने के बावजूद देश में एंट्री की गारंटी नहीं है। एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारी किसी भी समय इंटरव्यू ले सकते हैं। यदि आवेदक अपनी नौकरी, सैलरी या पढ़ाई से जुड़े सवालों के सही जवाब अंग्रेजी में नहीं दे पाता, तो उसे तुरंत वापस भेजा जा सकता है। हाल ही में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
भारतीयों के वर्क वीजा आवेदन खारिज
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 के दौरान वर्क वीजा रिजेक्शन रेट में भी भारी उछाल आया है। हर 10 में से 3 से 4 भारतीयों के वर्क वीजा आवेदन खारिज किए जा रहे हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि अब केवल मजबूत प्रोफाइल और सही दस्तावेज वाले आवेदकों को ही मंजूरी मिल रही है।
स्टूडेंट वीजा रिजेक्शन के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आए हैं। इनमें सबसे अहम है फंड्स की पारदर्शिता। इमिग्रेशन अधिकारी अब बैंक स्टेटमेंट्स और एजुकेशन लोन की गहन जांच कर रहे हैं। नकली या संदिग्ध फंड्स मिलने पर सीधे आवेदन रद्द कर दिया जाता है। इसके अलावा, यदि अधिकारियों को यह संदेह होता है कि आवेदक का मुख्य उद्देश्य पढ़ाई नहीं, बल्कि नौकरी करना या स्थायी रूप से बसना है, तो भी वीजा खारिज किया जा सकता है।
हजारों परिवारों पर असर
कमजोर अकादमिक रिकॉर्ड भी एक बड़ी वजह बनकर सामने आया है। कम अंक, पढ़ाई में लंबा गैप या अंग्रेजी में कम स्कोर वाले छात्रों के आवेदन ज्यादा रिजेक्ट हो रहे हैं। वहीं, फर्जी दस्तावेज जैसे गलत एक्सपीरियंस लेटर या नकली शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी बड़ी संख्या में रिजेक्शन का कारण बन रहे हैं।
हर साल पंजाब से करीब 10 हजार छात्र स्टडी वीजा पर न्यूजीलैंड जाते हैं, जबकि लगभग 35 हजार युवा वर्क परमिट के जरिए वहां पहुंचते हैं। ऐसे में नए नियमों का असर हजारों परिवारों पर पड़ना तय है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब विदेश जाने की योजना बना रहे युवाओं को अपनी प्रोफाइल मजबूत करनी होगी, सही दस्तावेज तैयार रखने होंगे और नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा, तभी उन्हें सफलता मिल सकेगी।











