‘डेली संवाद EXPOSED’: एफएंडसीसी में 30.50 लाख रुपए की चपत!, 31% की बजाए 15% लेस रेट पर काम देकर ठेकेदार को मालामाल करने की बड़ी साजिश, देखें सबूत

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⏱️ 7 मिनट पढ़ने का समय|📝 864 शब्द|📅 03 Nov 2018

महाबीर सेठ
डेली संवाद, जालंधर

नगर निगम के खजाने को 30.50 लाख रुपए से ज्यादा की चपत लगाने का प्रस्ताव एफएंडसीसी की बैठक में पारित किया गया है। जो विकास काम पहले 31 फीसदी लेस रेट पर ठेेकेदार करने वाला था, उसी काम को अब कांग्रेस के एक नेता ने उसी ठेकेदार को 15 फीसदी लेस पर दिलवाने में कामयाब रहे हैं। इस पूरे काम में करीब 30.50 लाख रुपए सरकार को चपत लगने जा रही है।

केस-1 : निगम को 10.19 लाख की चपत

शनिवार को एफएंडसीसी की बैठक में प्रस्ताव संख्या 199 पारित किया गया। इस प्रस्ताव के मुताबिक वार्ड-30 के चारबाग औऱ रियाजपुरा में गलियों के काम लिए टैंडर मांगे गए। काम 32.90 लाख रुपए का प्रस्तावित किया गया। निगम ने 11 नवंबर 2017 को टैंडर काल किया। किसी ने टैंडर नहीं भरा। 2 जनवरी 2018 को फिर से टैंडर निकाला गया। तीन टैंडर आए। इसमें तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी ने 31 फीसदी लेस रेट पर काम करने का टैंडर भरा। जिसे निगम ने एप्रूव किया। लेकिन अर्नेस्ट मनी न जमा करवाने पर ठेकेदार ने काम से हाथ पीछे खींच लिया।

अब इसी काम के लिए निगम ने 9 अगस्त 2018 को टैंडर रिकाल किया। इस बार सिंगल टैंडर उसी तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी का आया, जिसने 8 महीने पहले अर्नेस्ट मनी न जमा कर काम से पीछे हट गया। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि अफसरों ने उसी ठेकेदार को फिर से काम देने का मन बना लिया, वह भी 15 फीसदी लेस रेट पर। जबकि 8 महीने पहले यही ठेकेदार इसी काम को 31 फीसदी लेस रेट पर करने जा रहा था। कुल मिलाकर 32.90 लाख के काम में 16 फीसदी यानि 10.19 लाख रुपए निगम का नुकसान हो रहा है।

'डेली संवाद EXPOSED': एफएंडसीसी में 30.50 लाख रुपए की चपत!, 31% की बजाए 15% लेस रेट पर काम देकर ठेकेदार को मालामाल करने की बड़ी साजिश, देखें सबूत

केस – 2 : इसमें 9.89 लाख रुपए की निगम को लगेगी चपत

प्रस्ताव संख्या 200 पारित किया गया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक बीटी कालोनीस दानिशमंदा श्मशानघाट, कोट बाजर में गलियों के काम लिए टैंडर मांगे गए। काम 31.91 लाख रुपए का प्रस्तावित किया गया। निगम ने 11 नवंबर 2017 को टैंडर काल किया। किसी ने टैंडर नहीं भरा। 2 जनवरी 2018 को फिर से टैंडर निकाला गया। तीन टैंडर आए। इसमें तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी ने 31 फीसदी लेस रेट पर काम करने का टैंडर भरा। जिसे निगम ने एप्रूव किया। लेकिन अर्नेस्ट मनी न जमा करवाने पर ठेकेदार ने काम से हाथ पीछे खींच लिया।

अब इसी काम के लिए निगम ने 9 अगस्त 2018 को टैंडर रिकाल किया। इस बार सिंगल टैंडर उसी तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी का आया, जिसने 8 महीने पहले अर्नेस्ट मनी न जमा कर काम से पीछे हट गया। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि अफसरों ने उसी ठेकेदार को फिर से काम देने का मन बना लिया, वह भी 15 फीसदी लेस रेट पर। जबकि 8 महीने पहले यही ठेकेदार इसी काम को 31 फीसदी लेस रेट पर करने जा रहा था। कुल मिलाकर 31.91 लाख के काम में 16 फीसदी यानि 9.89 लाख रुपए निगम का नुकसान हो रहा है।

'डेली संवाद EXPOSED': एफएंडसीसी में 30.50 लाख रुपए की चपत!, 31% की बजाए 15% लेस रेट पर काम देकर ठेकेदार को मालामाल करने की बड़ी साजिश, देखें सबूत

केस-3 :  निगम को 10.41 लाख रुपए की लगेगा चूना

प्रस्ताव संख्या 201 पारित किया गया। इस प्रस्ताव के मुताबिक वार्ड-11 और वार्ड-12 के परागपुर में गलियों के काम लिए टैंडर मांगे गए। काम 33.60 लाख रुपए का प्रस्तावित किया गया। निगम ने 11 नवंबर 2017 को टैंडर काल किया। किसी ने टैंडर नहीं भरा। 2 जनवरी 2018 को फिर से टैंडर निकाला गया। तीन टैंडर आए। इसमें तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी ने 31 फीसदी लेस रेट पर काम करने का टैंडर भरा। जिसे निगम ने एप्रूव किया। लेकिन अर्नेस्ट मनी न जमा करवाने पर ठेकेदार ने काम से हाथ पीछे खींच लिया।

अब इसी काम के लिए निगम ने 9 अगस्त 2018 को टैंडर रिकाल किया। इस बार सिंगल टैंडर उसी तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी का आया, जिसने 8 महीने पहले अर्नेस्ट मनी न जमा कर काम से पीछे हट गया। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि अफसरों ने उसी ठेकेदार को फिर से काम देने का मन बना लिया, वह भी 15 फीसदी लेस रेट पर। जबकि 8 महीने पहले यही ठेकेदार इसी काम को 31 फीसदी लेस रेट पर करने जा रहा था। कुल मिलाकर 33.60 लाख के काम में 16 फीसदी यानि 10.41 लाख रुपए निगम का नुकसान हो रहा है।

'डेली संवाद EXPOSED': एफएंडसीसी में 30.50 लाख रुपए की चपत!, 31% की बजाए 15% लेस रेट पर काम देकर ठेकेदार को मालामाल करने की बड़ी साजिश, देखें सबूत

कांग्रेसी नेता का अफसरों पर दबाव, पारित हो गया एजैंडा

सूत्र बता रहे हैं कि नगर निगम को चूना लगाने के लिए एक कांग्रेसी नेता सुनियोजित तरीके से ठेकेदार के साथ मिलकर ये प्रस्ताव तैयार करवाया। जो काम पहले 31 फीसदी कम रेट पर होना था, उसे अब 15 फीसदी कम रेट पर करवाया जा रहा है। इसमें 16 फीसदी सीधे सरकार का नुकसान हो रहा है। ये 16 फीसदी यानि 30.50 लाख रुपए उक्त कांग्रेसी नेता और ठेकेदार में बंटना है।

नगर निगम अफसरों का तर्क

प्रस्ताव में नगर निगम के अफसरों ने जो तर्क दिया है, वह भी अजीब है। तर्क में कहा गया है कि ठेकेदार ने अब 31 की बजाए 15 फीसदी लेस इसलिए दे रहा है क्योंकि 8 महीने के दौरान मैटेरियल का रेट बढ़ गया है। जिससे अब ठेकेदार 15 फीसदी ही लेस दे सकेगा।

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