नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह तामझाम वाले शादी समारोहों में अतिथियों की संख्या सीमित करने और कैटरिंग व्यवस्था को संस्थागत करने की नीति पर विचार कर रही है। यह कदम ऐसे समारोहों में भोजन की बर्बादी रोकने के लिए उठाया जाएगा।
जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को दिल्ली के मुख्य सचिव विजय कुमार देव ने बताया कि छह दिसंबर के आदेश में कोर्ट द्वारा उठाए गए मुद्दे पर चर्चा की गई है। कोर्ट ने शादी समारोहों में भोजन की बर्बादी और पानी के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी।
पीठ में जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस हेमंत गुप्ता भी शामिल
अदालत में मौजूद देव ने कहा कि कोर्ट ने पिछले सप्ताह जिस तरह से व्यवस्था दी थी उसके अनुरूप ही सरकार विचार कर रही है। अधिकारी दिल्ली के लोगों के हितों को संतुलित रखने में जुटे हैं। सुनवाई कर रही पीठ में जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस हेमंत गुप्ता भी शामिल हैं।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘यह कहा गया है (मुख्य सचिव द्वारा) कि कुछ विकल्पों पर चर्चा की जा रही है। कम से कम दो विकल्प उपलब्ध हैं और दो रणनीति पर भी सक्रियता से विचार किया जा रहा है ताकि समारोह में भोजन की उपलब्धता और अतिथियों की संख्या सीमित की जा सके। भोजन की गुणवत्ता भी बनी रहे।’ देव ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर उपराज्यपाल से चर्चा की है। लगता है कि दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल सहमत हैं।
शादी विवाह समारोहों में बचा हुआ भोजन बर्बाद हो जाता है
उन्होंने कहा कि प्राप्त सूचना के अनुसर दिल्ली में शादी विवाह समारोहों में बचा हुआ भोजन बर्बाद हो जाता है या फिर बचा हुआ भोजन कैटरर बाद में होने वाले शादी समारोहों में इस्तेमाल करते हैं। पीठ ने देव से कहा कि पहले इस मामले में एक नीति तैयार की जाये उसके बाद दूसरा बड़ा कदम ठीक से इस पर अमल करना होगा। दिल्ली सरकार के वकील ने नीति तैयार करने के लिये आठ सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया।
Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…










