अनिल मालवीय, वरिष्ठ पत्रकार
Gen Z Protest: जेन जी को आंदोलन करने के लिए बाध्य करने का काम सरकार से जुड़े संगठनों तमाम टीवी एंकरों और समाचार-पत्रों ने किया है। हो सकता है आपको यह बात अटपटी लगे। लेकिन, यही सच है। बीते बारह वर्ष की इन कार्यप्रणाली पर नज़र डालें तो सबकुछ साफ नज़र आ जाएगा।
बानगी के तौर पर बारह वर्ष पहले जिन मुद्दों का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके सहयोगियों और संगठनों ने मीडिया के साथ मिलकर विरोध किया था, बारह वर्ष में उसी मुद्दे पर पूरी तरह पलट गये। विपक्षी दलों को विद्रूप बना दिया।
मीडिया ने सरकार की गलत नीतियों पर सवाल करने की जगह स्तुतिगान करना प्रारंभ कर दिया। नया इतिहास गढ़ा जाने लगा! सारा दोष पूर्ववर्ती सरकारों और उनके नेताओं पर डाला जाने लगा।
धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल में बदला जाने लगा। गली -गली शराब की दुकानें खुलने लगी। किसी राज्य में जाति विशेष का वर्चस्व दिखाई देने लगा तो किसी एक राज्य विशेष में विकास की गति तेज़ हो गई। यही नहीं उस राज्य के लोग विभिन्न राज्यों में आधिपत्य जमाने लगे।
अपने ही लोगों के वोट काटे जाने लगे, उन्हें सरकार और उससे जुड़े संगठनों की आलोचना करने पर राष्ट्रविरोधी कहा जाने लगा। जगह-जगह बुलडोजर का बोलबाला हो गया। उसे पढ़ लिख पकौड़े तलने का उपदेश दिया जाने लगा। परीक्षा पत्र सीरियल की तरह लीक होने लगे। नौकरी खत्म होने लगी।
जेन जी यह सारा तमाशा देख रहा था। वह अपने आंखों से अपने परिवार और भाई बहनों को टूटता देख रहा था। उसे अवसर की तलाश थी। इसी बीच उसकी ही उम्र और समाज में सम्मानित व्यक्ति के आह्वान पर सड़क पर उतर आया।
उसे लगा कि अब देरी हुई तो कहीं का नहीं रहेगा। उसने साफ संदेश दिया कि देश को एकतरफा नहीं चलने दिया जाएगा। जेन जी का मानना था कि जो ग़लत है उसका विरोध सीना ठोक कीजिए, इतिहास आपको बागी कह सकता है गुलाम नहीं।