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Punjab News: मुख्यमंत्री सेहत योजना के 6 महीने पूरे, 2.42 लाख मरीजों को रु852 करोड़ का कैशलेस इलाज

Dr. Balbir Singh
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की प्रमुख ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’, जिसकी शुरुआत इसी वर्ष 8 जनवरी को की गई थी, पिछले छह महीनों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरी है। इस अवधि में 2,42,917 मरीजों को 4,79,602 कैशलेस उपचार उपलब्ध कराए गए, जिनकी कुल लागत लगभग 852 करोड़ रुपये रही। इस योजना ने हजारों परिवारों को महंगे इलाज के आर्थिक बोझ से राहत प्रदान की है। अब तक 47 लाख से अधिक स्वास्थ्य कार्ड पंजीकृत किए जा चुके हैं। यह योजना राज्य में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध करा रही है। पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस योजना ने सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ महंगे और विशिष्ट उपचारों की जरूरतों को भी सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिससे प्रत्येक नागरिक को बिना किसी आर्थिक कठिनाई के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।

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उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना परिवारों को महंगे इलाज के खर्च से सुरक्षा प्रदान करने वाली एक सामाजिक सुरक्षा योजना है। 47 लाख से अधिक पंजीकरण और 852 करोड़ रुपये के कैशलेस उपचार इस बात का प्रमाण हैं कि लोगों ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की उस सोच पर भरोसा जताया है, जिसके तहत प्रत्येक घर तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।” योजना के लाभों की जानकारी साझा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि क्रॉनिक हीमोडायलिसिस इस योजना के अंतर्गत सबसे अधिक लाभ प्राप्त करने वाला उपचार रहा है। इसके तहत 1.58 लाख से अधिक डायलिसिस सत्र किए गए, जिससे किडनी फेल होने के कारण सप्ताह में कई बार डायलिसिस कराने को विवश मरीजों को बड़ी राहत मिली।

लगभग 12,400 ऑपरेशन किए

उन्होंने बताया कि लेप्रोस्कोपिक गॉलब्लैडर (पित्ताशय) सर्जरी के लगभग 12,400 ऑपरेशन किए गए हैं। इसके अतिरिक्त प्राइमरी टोटल नी रिप्लेसमेंट, सिजेरियन डिलीवरी, सामान्य प्रसव, हिस्टरेक्टॉमी, हिप रिप्लेसमेंट तथा जनरल लैपरोटॉमी जैसी सेवाओं का भी बड़ी संख्या में लाभ उठाया गया, जिनमें प्रत्येक के लगभग 8,700 से 8,900 मामले दर्ज किए गए। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि जहां डायलिसिस से सर्वाधिक मरीज लाभान्वित हुए, वहीं जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं पर सबसे अधिक व्यय हुआ। प्राइमरी टोटल नी रिप्लेसमेंट पर लगभग 70.86 करोड़ रुपये, जबकि पीटीसीए विद डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम (हृदय में स्टेंट डालने की प्रक्रिया) पर लगभग 70.02 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अतिरिक्त लेप्रोस्कोपिक गॉलब्लैडर सर्जरी पर लगभग 36.28 करोड़ रुपये व्यय किए गए। हिप रिप्लेसमेंट, स्पाइन सर्जरी, कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी), मोतियाबिंद ऑपरेशन, द्विपक्षीय हर्निया रिपेयर तथा हिस्टरेक्टॉमी भी योजना के अंतर्गत सर्वाधिक खर्च वाले उपचारों में शामिल रहे।

गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध

उन्होंने कहा, “उपचार संबंधी आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है। जहां हजारों लाभार्थियों को प्रतिदिन डायलिसिस, मातृ स्वास्थ्य सेवाएं और आपातकालीन उपचार मिल रहे हैं, वहीं हृदय, ऑर्थोपेडिक और अन्य गंभीर शल्य चिकित्सा की आवश्यकता वाले मरीजों को भी पूरी तरह निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।”