Skip to content

Punjab News: पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ने रक्तदाताओं और युवाओं से अंगदान के लिए आगे आने की अपील की

पंजाब स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (पीएसबीटीसी) द्वारा यहां म्यूनिसिपल भवन में आयोजित राज्य स्तरीय एनजीओ सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने स्वैच्छिक संगठनों और समाजसेवियों को ‘उम्मीद के फरिश्ते और भगवान के दूत’ बताते हुए उनकी सराहना की।

Punjab News: पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ने रक्तदाताओं और युवाओं से अंगदान के लिए आगे आने की अपील की
Share Facebook X WhatsApp Telegram Email
View in ePaper

डेली संवाद, ​चंडीगढ़। Punjab News: समाज से रक्तदान से एक कदम आगे बढ़कर स्वैच्छिक रूप से अंगदान करने की अपील करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज स्वैच्छिक रक्तदाताओं और युवाओं से आगे आकर अंगदान का संकल्प लेने का आह्वान किया।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मस्तिष्क के काम करना बंद कर देने की स्थिति में अंगदान के माध्यम से गंभीर रूप से बीमार कई मरीजों को नया जीवन प्रदान किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रहे

पंजाब स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (पीएसबीटीसी) द्वारा यहां म्यूनिसिपल भवन में आयोजित राज्य स्तरीय एनजीओ सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने स्वैच्छिक संगठनों और समाजसेवियों को ‘उम्मीद के फरिश्ते और भगवान के दूत’ बताते हुए उनकी सराहना की।

उन्होंने कहा कि ये संगठन जीवन और मृत्यु से जूझ रहे मरीजों तथा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रहे हैं। सम्मेलन के दौरान डॉ. बलबीर सिंह ने पंजाब भर में रक्तदान के माध्यम से मानवता की सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाली तथा अपने-अपने जिलों में अग्रणी स्थान हासिल करने वाली 69 स्वैच्छिक रक्तदान एनजीओ को सम्मानित भी किया।

दिशा-निर्देश जारी किए

रक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल में प्रगति को रेखांकित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने घोषणा की कि पंजाब न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (एनएटी) और केमिल्यूमिनेसेंस इम्यूनोऐसे (सीएलआईए ) सहित अत्याधुनिक जांच तकनीकों को अपनाकर अपनी रक्त सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत कर रहा है। ये तकनीकें डायग्नोस्टिक विंडो पीरियड को कम करके रक्त चढ़ाने के कारण होने वाले एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों की समय रहते पहचान करने में मदद करती हैं, जिससे संक्रमण के प्रसार का जोखिम काफी कम किया जा सकता है।

उन्होंने आगे बताया कि राज्य के ब्लड केंद्रों में गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रक्त संग्रह, जांच, ब्लड बैग की एकरूप लेबलिंग तथा क्रॉस-मैचिंग के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

पंजाब में 201 लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर हैं

नियमित रूप से रक्तदान करने वाले लोगों की अनावश्यक भागदौड़ कम करने और आपातकालीन प्रतिक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने स्वैच्छिक रक्तदाताओं की व्यापक शहर-वार डिजिटल डायरेक्टरी तैयार करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक रक्तदाताओं को अलग-अलग शिविरों में बुलाने के बजाय एक समर्पित शहर-आधारित डायरेक्टरी तैयार करने से गंभीर आपातकाल के समय ब्लड केंद्र बिना किसी भागदौड़ के आवश्यक रक्त समूह के दाताओं से तत्काल संपर्क कर सकेंगे।

पंजाब में नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के मजबूत नेटवर्क पर गर्व व्यक्त करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि राज्य ने इस क्षेत्र में एक सुदृढ़ व्यवस्था विकसित की है। वर्तमान में पंजाब में 201 लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर हैं, जिनमें 51 सरकारी, 7 सेना से संबंधित तथा 143 निजी/ट्रस्ट द्वारा संचालित केंद्र शामिल हैं।

तीन सफल लिवर ट्रांसप्लांट किए

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पंजाब में 5,44,167 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। वहीं अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच आयोजित 2,065 स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों के माध्यम से 1,84,194 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया, जिसमें स्वैच्छिक रक्तदान की दर 96.04 प्रतिशत रही। इसके अतिरिक्त, 13 जिलों के 17 ब्लड सेंटरों में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं और शीघ्र ही इन्हें राज्य के बाकी जिलों में भी उपलब्ध करवाने की योजना है।

अंगदान मिशन के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि हाल ही में स्थापित पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (पी. आई. एल. बी. एस.) ने सरकारी क्षेत्र में मात्र 15 दिनों के भीतर तीन सफल लिवर ट्रांसप्लांट किए हैं। ये ट्रांसप्लांट बाजार में होने वाले खर्च की तुलना में लगभग एक-तिहाई लागत पर किए गए हैं।

युवाओं से अपील की

उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू की जाएगी। उन्होंने परिवारों और आम लोगों से सक्रिय रूप से अंगदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि ब्रेन डेथ की स्थिति में किडनी, लिवर और कॉर्निया जैसे महत्वपूर्ण अंगों का दान करके कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

युवा महिलाओं में एनीमिया की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने युवाओं और भावी दंपतियों से एनीमिया को खत्म करने तथा बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित व्यायाम, प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से भरपूर संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू ) और फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के सहयोग से महिलाओं तथा खिलाड़ियों के लिए आहार संबंधी विशेष एडवाइजरी भी जारी की है।

रक्तदान की मजबूत संस्कृति को दर्शाता

इससे पहले ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग, पीजीआईएमईआर के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. आर. आर. शर्मा ने कहा कि हालांकि पंजाब आधिकारिक तौर पर स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में भारत में तीसरे स्थान पर है, लेकिन नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों के मामले में राज्य देश में प्रथम स्थान पर है। पंजाब में लगभग 80 प्रतिशत रक्तदाता नियमित रूप से रक्तदान करते हैं, जो राज्य में रक्तदान की मजबूत संस्कृति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि ये समर्पित रक्तदाता रक्त की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मरीजों, विशेषकर पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ तथा पंजाब में उपचार प्राप्त कर रहे मरीजों के लिए अत्यंत सहायक साबित होते हैं।

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर डॉ. सुचेत सचदेव (अतिरिक्त प्रोफेसर, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़), डॉ. परमजीत कौर (प्रोफेसर, जीएमसीएच -32), डॉ. संगीता कुमारी (एसोसिएट प्रोफेसर, पीजीआईएमईआर) और डॉ. एकाज जिंदल (वरिष्ठ सलाहकार, एमडीओएच लुधियाना) सहित प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रक्त सुरक्षा और रक्तदाताओं की लामबंदी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

इस अवसर पर विशेष सचिव स्वास्थ्य-सह-प्रोजेक्ट डायरेक्टर PSACS साक्षी साहनी, प्रिंसिपल जीएमसीएच-32 डॉ. रवनीत कौर, अतिरिक्त प्रोजेक्ट डायरेक्टर पीएसएसीएस डॉ. विशाल गर्ग और ज्वाइंट डायरेक्टर ब्लड ट्रांसफ्यूजन सर्विसेज डॉ. सुनीता देवी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।