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US Visa: अमेरिका जाने का सपना देख रहे डॉक्टरों और रिसर्चर्स को झटका, वीजा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

US Visa: अमेरिका जाने का सपना देख रहे डॉक्टरों और रिसर्चर्स को झटका, वीजा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी
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डेली संवाद, अमेरिका। US Visa: अमेरिका में पढ़ाई, रिसर्च और मेडिकल ट्रेनिंग के लिए जाने वाले भारतीयों के लिए आने वाले समय में नियम और सख्त हो सकते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने J-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव जारी किया है।

वहीं यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारतीय वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं और प्रशिक्षुओं के लिए अमेरिका में रहना और काम करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

चार साल की तय अवधि के बाद लेना होगा एक्सटेंशन

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार J-1 वीजा धारकों को अमेरिका में अधिकतम चार वर्ष तक रहने की अनुमति मिलेगी। इसके बाद वहां रुकने के लिए वीजा अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यदि संबंधित एजेंसी विस्तार की मंजूरी नहीं देती है, तो व्यक्ति को अपना रिसर्च, ट्रेनिंग या शैक्षणिक कार्यक्रम बीच में छोड़कर वापस लौटना पड़ सकता है।

स्पॉन्सर संस्थानों पर भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

नए मसौदे में उन संस्थानों के लिए भी कड़े अनुपालन नियम शामिल किए गए हैं, जो J-1 वीजा धारकों को स्पॉन्सर करते हैं। विश्वविद्यालयों, रिसर्च संस्थानों और अस्पतालों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वीजा धारक सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में स्पॉन्सर संस्थानों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।

किन परिस्थितियों में खत्म हो सकता है कार्यक्रम

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में किसी व्यक्ति का एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम समाप्त किया जा सकता है। इनमें आपराधिक गतिविधियां, धोखाधड़ी, गलत जानकारी देना, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले या अन्य ऐसी स्थितियां शामिल हैं, जो वीजा पात्रता को प्रभावित करती हों।

60 दिनों तक मांगी जाएंगी लोगों की राय

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले 60 दिनों के लिए सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इस अवधि के बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा कर नियमों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

भारतीयों पर क्या होगा प्रभाव?

J-1 वीजा का उपयोग बड़ी संख्या में भारतीय डॉक्टर, पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्चर, विश्वविद्यालयों के फैकल्टी सदस्य, वैज्ञानिक, शिक्षक, इंटर्न और मेडिकल फेलोशिप करने वाले पेशेवर करते हैं। वित्त वर्ष 2024 में भारतीय नागरिकों को 12 हजार से अधिक J-1 वीजा जारी किए गए थे।

अगर प्रस्तावित नियम लागू हो जाते हैं, तो भारतीय पेशेवरों को वीजा अवधि, एक्सटेंशन प्रक्रिया और कार्यक्रम जारी रखने को लेकर पहले से अधिक नियमों का पालन करना होगा। इससे अमेरिका में लंबी अवधि की पढ़ाई, रिसर्च और मेडिकल प्रशिक्षण करने वाले लोगों पर सीधा असर पड़ सकता है।

क्या है J-1 वीजा?

J-1 वीजा अमेरिका का एक्सचेंज विजिटर वीजा है, जिसे शिक्षा, रिसर्च, मेडिकल ट्रेनिंग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और प्रोफेशनल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए जारी किया जाता है। इस वीजा के माध्यम से दुनिया भर के छात्र, शोधकर्ता, डॉक्टर, शिक्षक और अन्य पेशेवर अमेरिकी संस्थानों में निर्धारित अवधि तक काम, अध्ययन या प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।