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Punjab News: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 9.51 लाख ठगे, साइबर ठग ने खुद को बताया जांच एजेंसी का अधिकारी

साइबर ठगों ने एक महिला को मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में फंसाने का डर दिखाकर उससे 9 लाख 51 हजार 347 रुपए ठग लिए। मामले की जांच करते हुए चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने हावड़ा से राज कुमार शॉ (34) को गिरफ्तार किया है।

Punjab News: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 9.51 लाख ठगे, साइबर ठग ने खुद को बताया जांच एजेंसी का अधिकारी
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने एक महिला को मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में फंसाने का डर दिखाकर उससे 9 लाख 51 हजार 347 रुपए ठग लिए। मामले की जांच करते हुए चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने हावड़ा, पश्चिम बंगाल से राज कुमार शॉ (34) को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, चंडीगढ़ निवासी महिला को एक व्यक्ति ने फोन किया और खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताया। आरोपी ने महिला पर मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके बाद उसे गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया गया।

जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर किया फोन

ठगों ने महिला को बताया कि उसके बैंक खातों की जांच की जा रही है और मामले से बचने के लिए बताए गए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करनी होगी। डर और दबाव में आकर महिला ने 9,51,347 रुपए आरोपी द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने जांच शुरू की।

पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, तकनीकी जानकारी और पैसों के लेन-देन का विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि ठगी की रकम सीधे राज कुमार शॉ के बैंक खाते में पहुंची थी। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान की और उसकी लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस की टीम हावड़ा, पश्चिम बंगाल पहुंची और दबिश देकर राज कुमार शॉ को गिरफ्तार कर लिया।

अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा

गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी को चंडीगढ़ लेकर आई। पूछताछ के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस साइबर ठगी में एक अन्य व्यक्ति की भूमिका हो सकती है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुलिस अब दूसरे व्यक्ति की पहचान और उसकी भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी किसी बड़े साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है या नहीं।

बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की जांच जारी

पुलिस अब ठगी की रकम के आगे के लेन-देन की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि रकम को किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।

पुलिस तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री के आधार पर मामले में शामिल अन्य आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से रहें सावधान

पुलिस ने लोगों से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली साइबर ठगी से सावधान रहने की अपील की है। साइबर ठग अक्सर खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर किसी व्यक्ति से पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती।

अगर किसी व्यक्ति को ऐसा फोन या वीडियो कॉल आता है तो घबराने के बजाय अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP या अन्य निजी जानकारी साझा न करें और किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। ऐसे मामलों की तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम पुलिस को सूचना दें।