डेली संवाद, चंडीगढ़। Tenancy Rules 2026: चंडीगढ़ प्रशासन के एस्टेट डिपार्टमेंट ने Union Territory of Chandigarh Tenancy Rules, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। नए नियमों का उद्देश्य शहर में मकान मालिक और किरायेदार के बीच संबंधों में पारदर्शिता बढ़ाना, किरायेदारी विवादों को कम करना और मामलों का जल्द निपटारा करना है।
डिप्टी कमिश्नर-कम-एस्टेट ऑफिसर निशांत कुमार यादव ने कहा कि नए नियमों से चंडीगढ़ में किरायेदारी व्यवस्था में सुगमता, पारदर्शिता और स्थिरता आएगी। नए नियमों के तहत किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए ऑनलाइन जानकारी देने, डिजिटल रिकॉर्ड रखने और किराये से जुड़े विवादों के निपटारे की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है।
एग्रीमेंट के 2 महीने के भीतर ऑनलाइन देनी होगी जानकारी
नए टेनेंसी रूल्स के मुताबिक किरायेदारी एग्रीमेंट होने के 2 महीने के भीतर मकान मालिक और किरायेदार को संयुक्त रूप से या अलग-अलग ऑनलाइन Rent Authority को इसकी जानकारी देनी होगी।
जानकारी प्राप्त होने के बाद Rent Authority की ओर से 7 दिनों के भीतर Unique Identification Number (UIN) जारी किया जाएगा। इसकी ई-रसीद संबंधित पक्षों के मोबाइल नंबर या ईमेल पर भेजी जाएगी।
इससे किरायेदारी समझौतों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और विवाद की स्थिति में जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
3 महीने में तैयार होगा डिजिटल टेनेंसी प्लेटफॉर्म
चंडीगढ़ प्रशासन नए नियमों के तहत 3 महीने के भीतर किरायेदारी के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करेगा।
इस प्लेटफॉर्म पर OTP आधारित वेरिफिकेशन की सुविधा होगी। मकान मालिक और किरायेदार जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे।
प्लेटफॉर्म स्थानीय भाषा में भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका आसानी से इस्तेमाल कर सकें। किरायेदारी से जुड़े रिकॉर्ड को गोपनीय रखा जाएगा और इन्हें केवल संबंधित पक्षों तथा अधिकृत अधिकारियों को ही उपलब्ध कराया जाएगा।
किराया, बिजली-पानी और मेंटेनेंस विवाद भी Rent Authority में
नए नियमों के तहत किराया, बिजली, पानी और मेंटेनेंस चार्ज से जुड़े विवाद होने पर Rent Authority के सामने आवेदन किया जा सकेगा।
विवाद का फैसला करते समय संबंधित क्षेत्र में चल रहे प्रचलित किराये को भी ध्यान में रखा जाएगा। इससे किराये को लेकर होने वाले विवादों के समाधान में मदद मिलने की उम्मीद है।
मकान मालिक किराया लेने से मना करे तो क्या होगा?
अगर मकान मालिक किराया लेने से इनकार करता है तो किरायेदार 2 महीने तक RTGS, NEFT या चेक के जरिए किराया भेज सकता है।
यदि इसके बाद भी मकान मालिक किराया स्वीकार नहीं करता है तो किरायेदार वह किराया सीधे Rent Authority के पास जमा कर सकता है। इस प्रावधान से किराया भुगतान को लेकर होने वाले विवादों में किरायेदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
नोटिस का 15 से 30 दिन में देना होगा जवाब
नए नियमों में विवादों के निपटारे के लिए समयसीमा भी निर्धारित की गई है। नोटिस मिलने के बाद दूसरी पार्टी को 15 से 30 दिनों के भीतर जवाब देना होगा।
इससे किरायेदारी से जुड़े मामलों को लंबे समय तक लंबित रखने की संभावना कम होगी और दोनों पक्षों को निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
Rent Tribunal को 60 दिन में करना होगा अपील का फैसला
नए नियमों के तहत Rent Tribunal को अपील मिलने के बाद 60 दिनों के भीतर फैसला करना होगा। इसके अलावा, Rent Court की ओर से जारी आदेशों का पालन संबंधित पक्षों को 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।
इस समयसीमा का उद्देश्य किरायेदारी विवादों के मामलों में जल्द निर्णय और आदेशों के समय पर पालन को सुनिश्चित करना है।
किरायेदारी व्यवस्था में आएगी पारदर्शिता
चंडीगढ़ प्रशासन का मानना है कि Chandigarh Tenancy Rules 2026 लागू होने से मकान मालिकों और किरायेदारों के अधिकार एवं जिम्मेदारियां अधिक स्पष्ट होंगी।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, UIN, डिजिटल रिकॉर्ड और विवादों के लिए निर्धारित समयसीमा से किरायेदारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
नए नियमों की खास बातें
किरायेदारी एग्रीमेंट की जानकारी 2 महीने के भीतर ऑनलाइन देनी होगी।
Rent Authority 7 दिनों में UIN जारी करेगी।
3 महीने में डिजिटल टेनेंसी प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा।
OTP आधारित ऑनलाइन वेरिफिकेशन की सुविधा होगी।
किराया, बिजली-पानी और मेंटेनेंस विवाद Rent Authority में उठाए जा सकेंगे।
मकान मालिक किराया न ले तो 2 महीने तक RTGS, NEFT या चेक से भुगतान किया जा सकेगा।
नोटिस का जवाब 15 से 30 दिनों में देना होगा।
Rent Tribunal अपील पर 60 दिनों में फैसला करेगा।
Rent Court के आदेश का पालन 30 दिनों में करना होगा।