डेली संवाद, मोगा। Punjab News: पंजाब के मोगा (Moga) जिले में रिश्वत मामले में गिरफ्तार कोट ईसे खां थाने की SHO इंस्पेक्टर सुनीता बावा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विजिलेंस ब्यूरो अब उनके खिलाफ पहले मिली शिकायतों की भी दोबारा जांच कर रहा है। इसके साथ ही उनके पुराने कार्यकाल, संपर्कों, संपत्तियों और कथित तौर पर बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक सुनीता बावा वर्ष 2011 में कांस्टेबल के पद पर पंजाब पुलिस (Punjab Police) में भर्ती हुई थीं। इसके बाद उन्होंने B-1 परीक्षा पास कर हेड कांस्टेबल का पद हासिल किया और विभागीय परीक्षा के माध्यम से सब इंस्पेक्टर बनीं। सब इंस्पेक्टर बनने के बाद वह मोगा जिले के विभिन्न थानों में SHO के पद पर तैनात रही हैं।
पुराने शिकायतों की भी जांच
विजिलेंस के मुताबिक सुनीता बावा के खिलाफ पहले भी पुलिस विभाग और विजिलेंस ब्यूरो में शिकायतें पहुंची थीं। इन शिकायतों में से कुछ की जांच लंबित बताई जा रही है। मौजूदा रिश्वत मामले के बाद विजिलेंस ने इन शिकायतों को फिर से खंगालना शुरू किया है।
विजिलेंस पुराने शिकायतकर्ताओं से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पहले लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य सामने आता है या नहीं।
मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच
विजिलेंस अधिकारी सुनीता बावा और उनके गनमैन गुरअवतार सिंह के मोबाइल फोन से जुड़े रिकॉर्ड की भी तकनीकी जांच कर रहे हैं। जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड, संदेश, चैट और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सुनीता बावा के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या रिश्वत से जुड़े मामलों में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।
बिचौलियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
विजिलेंस यह पता लगाने में जुटा है कि पुलिस विभाग या बाहरी लोगों में कोई ऐसा व्यक्ति तो नहीं था, जो कथित तौर पर रिश्वत के मामलों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता था।
इसके अलावा सुनीता बावा और उनके परिवार के नाम पर दर्ज मकान, प्लॉट, कमर्शियल प्रॉपर्टी और कृषि भूमि से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि संपत्तियों या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
पुराने थानों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे
सुनीता बावा पहले मोगा जिले के अलग-अलग थानों में SHO के पद पर तैनात रही हैं। विजिलेंस अब उनके पुराने कार्यकालों से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा कर रहा है।
जांच में उन मामलों को देखा जा रहा है, जिनमें शिकायतकर्ता या अन्य पक्षों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। विजिलेंस यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कहीं किसी मामले में नियमों के विपरीत कार्रवाई या समझौते का आरोप तो नहीं था।
क्या है पूरा रिश्वत मामला?
यह कार्रवाई नूरपुरा हकीमां निवासी राजविंदर सिंह की शिकायत पर की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि थाना कोट ईसे खां में दर्ज एक मामले में उसे नामजद करने का डर दिखाकर PHG गुरअवतार सिंह ने एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की।
बाद में कथित तौर पर 70 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। शिकायत के अनुसार गुरअवतार सिंह पहले ही अलग-अलग तारीखों में 20 हजार रुपये ले चुका था और इसके बाद बकाया 50 हजार रुपये की मांग की गई।
मोबाइल रिकॉर्डिंग के बाद विजिलेंस ने की कार्रवाई
शिकायतकर्ता ने रिश्वत की मांग से संबंधित बातचीत अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ली थी। उसने यह रिकॉर्डिंग विजिलेंस ब्यूरो की इंस्पेक्टर जगनदीप कौर के सामने पेश की।
इसके बाद विजिलेंस ने सरकारी गवाहों की मौजूदगी में कार्रवाई करते हुए गुरअवतार सिंह को कथित तौर पर रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
SHO सुनीता बावा भी गिरफ्तार
पूछताछ के दौरान विजिलेंस के अनुसार गुरअवतार सिंह ने कथित तौर पर बताया कि रिश्वत की रकम में से 50 हजार रुपये SHO इंस्पेक्टर सुनीता बावा को देने थे। इसके बाद विजिलेंस टीम ने 26 सितंबर को सुनीता बावा को गुरअवतार सिंह से कथित रिश्वत की रकम हासिल करते हुए गिरफ्तार किया।
अब विजिलेंस इस मामले में आगे की जांच कर रहा है। जांच के दौरान सामने आने वाले डिजिटल रिकॉर्ड, पुराने शिकायतों और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।