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Punjab News: पंजाब में बसों का चक्का जाम का ऐलान! 6500 कच्चे कर्मचारी हड़ताल पर, 2700 से ज्यादा बसों का संचालन हो सकता है प्रभावित

पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के करीब 6500 कच्चे कर्मचारी 22 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। यूनियन के मुताबिक हड़ताल से 2700 से ज्यादा बसों का संचालन प्रभावित होगा और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

Punjab News: पंजाब में बसों का चक्का जाम का ऐलान! 6500 कच्चे कर्मचारी हड़ताल पर, 2700 से ज्यादा बसों का संचालन हो सकता है प्रभावित
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब में 22 सितंबर से सरकारी बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के करीब 6500 कच्चे कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर 22 सितंबर से चक्का जाम करने का ऐलान किया है।

यूनियन के मुताबिक हड़ताल के कारण प्रदेश में 2700 से ज्यादा बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है। अगर हड़ताल तय कार्यक्रम के अनुसार होती है, तो रोजाना पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी की बसों में सफर करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

साढ़े चार साल से नियमित करने की मांग

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि कर्मचारी पिछले करीब साढ़े चार साल से सेवाएं नियमित करने और ठेकेदारी व्यवस्था खत्म करने की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि इस संबंध में सरकार के साथ अब तक करीब 60 से 65 बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।

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यूनियन के अनुसार 17 सितंबर को परिवहन मंत्री के साथ कर्मचारियों की बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन इसे रद्द कर दिया गया। यूनियन नेताओं का कहना है कि लगातार बैठकों के बावजूद मांगों का समाधान नहीं होने के कारण अब अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया गया है।

सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप

यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले ठेका कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें वेतन संबंधी सुविधाएं देने का वादा किया था। यूनियन का दावा है कि सरकार के कार्यकाल में परिवहन विभाग में अभी तक एक भी कच्चे कर्मचारी को नियमित नहीं किया गया।

कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों के भविष्य और नौकरी की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

PF और ESI को लेकर भी सवाल

यूनियन के महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने ठेकेदारों के माध्यम से कर्मचारियों के PF और ESI अंशदान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि PF और ESI के नाम पर कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है।

यूनियन ने मांग की है कि कर्मचारियों के PF और ESI से जुड़े मामलों की गंभीरता से जांच और समाधान किया जाए। साथ ही ठेकेदारी व्यवस्था खत्म कर कर्मचारियों को सीधे विभाग के अधीन करने की मांग की गई है।

800 बसें कंडम, नई बसें खरीदने की मांग

यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरकेश कुमार विक्की ने सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई। उनके अनुसार करीब 800 सरकारी बसें कंडम घोषित हो चुकी हैं, लेकिन नई बसों की खरीद पर्याप्त स्तर पर नहीं हुई है।

यूनियन महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी बसों का बेड़ा बढ़ाने के बजाय किलोमीटर स्कीम को बढ़ावा दे रही है। यूनियन का कहना है कि पंजाब में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारी बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

कर्मचारियों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग

यूनियन ने आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा जेल में बंद कर्मचारियों की रिहाई की मांग भी की गई है।

यूनियन नेताओं के अनुसार 22 सितंबर से बसों का चक्का जाम करने के साथ मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना भी दिया जाएगा। यूनियन ने कहा है कि यदि सरकार ने मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो आंदोलन जारी रहेगा।

फिलहाल हड़ताल को लेकर अंतिम स्थिति सरकार और यूनियन के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी। यदि 22 सितंबर से हड़ताल शुरू होती है, तो पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी की बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।