डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: मोहाली (Mohali) की अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में फर्जी पहचान और दस्तावेजों के जरिए खाता खोलकर 78 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी संदीप सिंह निवासी पठानकोट को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने का दोषी ठहराते हुए 3 साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है।
मामले में सामने आया कि आरोपी ने खुद को दूसरे व्यक्ति के नाम से पेश कर मोहाली (Mohali) के सेक्टर-71 स्थित PNB शाखा में खाता खुलवाया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित एक कारोबारी के खाते से जुड़े फर्जी चेक के जरिए 78 लाख रुपये इस खाते में ट्रांसफर करवाए गए और अगले ही दिन लाखों रुपये नकद निकाल लिए गए।
फर्जी पहचान से खुलवाया था बैंक खाता
मामला वर्ष 2016 का है। 12 अक्टूबर 2016 को आरोपी बैंक पहुंचा और खुद को नरिंदर सिंह निवासी सोहाना, सेक्टर-78, मोहाली बताया। खाता खोलने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बैंक में जमा करवाए।
आरोपी ने बैंक अधिकारियों को बताया कि उसने मोहाली में एक प्लॉट बेचा है और उससे मिलने वाली रकम नए बैंक खाते में जमा होगी।
फर्जी चेक से खाते में आए 78 लाख
26 अक्टूबर 2016 को आरोपी ने बैंक में 78 लाख रुपये का चेक जमा करवाया। यह चेक PNB की बैंक रोड शाखा, गोरखपुर के कैश क्रेडिट खाते से जुड़ा था और अशोक कुमार सिंह के नाम पर जारी बताया गया था।
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बैंक की शुरुआती जांच और यूवी लैंप से सत्यापन के बाद चेक क्लियर हो गया और 78 लाख रुपये आरोपी द्वारा खोले गए खाते में जमा हो गए।
अगले दिन निकाल लिए 66 लाख रुपये
रकम खाते में जमा होने के अगले ही दिन यानी 27 अक्टूबर 2016 को आरोपी ने बैंक से 66 लाख रुपये नकद निकाल लिए। इसके अलावा डेबिट/एटीएम कार्ड के जरिए भी खाते से अन्य लेनदेन किए गए।
इस तरह फर्जी दस्तावेजों और चेक के जरिए बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर बड़ी रकम निकाल ली गई।
दो महीने बाद असली खाताधारक पहुंचा बैंक
मामले का खुलासा दिसंबर 2016 में हुआ। 26 दिसंबर को गोरखपुर PNB शाखा के AGM/ब्रांच हेड ने मोहाली शाखा से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि असली खाताधारक अशोक कुमार सिंह खुद बैंक में मौजूद हैं और उन्होंने 78 लाख रुपये का कोई चेक जारी नहीं किया था।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि जिस चेक नंबर 659676 के जरिए 78 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे, वह चेक असली खाताधारक के पास उसकी चेकबुक में सुरक्षित मौजूद था।
फर्जी पते पर भी नहीं मिला कोई व्यक्ति
इसके बाद मोहाली बैंक अधिकारियों ने आरोपी द्वारा बैंक में दिए गए पते सोहाना, मोहाली पर जाकर सत्यापन किया। वहां नरिंदर सिंह नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला।
इसके बाद बैंक प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई और पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
पुलिस जांच में सामने आई संदीप सिंह की पहचान
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बैंक में नरिंदर सिंह बनकर खाता खुलवाने वाला व्यक्ति असल में संदीप सिंह निवासी पठानकोट था। जांच में आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए ड्राइविंग लाइसेंस की भी जांच की गई।
संबंधित RTA रिकॉर्ड में उस लाइसेंस का रिकॉर्ड मौजूद नहीं मिला। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के पास यूपी के कारोबारी अशोक कुमार सिंह के बैंक खाते से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी, चेक नंबर और हस्ताक्षर संबंधी जानकारी थी।
कोर्ट ने बैंक की अंदरूनी मिलीभगत की भी जांच के दिए निर्देश
अदालत ने मामले में यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि जनता के पैसे से जुड़े इस घोटाले की आगे की कड़ियों की जांच जरूरी है। अदालत ने प्रोसिक्यूशन विभाग को घोटाले में शामिल अन्य संदिग्धों और संभावित कड़ियों की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत के समक्ष यह पहलू भी सामने आया कि असली खाताधारक की बैंकिंग जानकारी और चेक से संबंधित गोपनीय जानकारी आरोपी तक कैसे पहुंची। अदालत ने बैंक के किसी अंदरूनी व्यक्ति की संभावित भूमिका की जांच की जरूरत भी बताई।
2017 में दर्ज हुई थी पुलिस शिकायत
इस मामले में PNB सेक्टर-71, मोहाली के तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुरेंद्र कुमार शर्मा की शिकायत पर थाना मटौर में मार्च 2017 में मामला दर्ज करवाया गया था।
लंबी जांच और अदालती कार्रवाई के बाद अब अदालत ने आरोपी संदीप सिंह को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है।