डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब की राजनीति में रविवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। जलालाबाद से कांग्रेस के पूर्व विधायक रमिंदर सिंह आवला शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। चंडीगढ़ में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।
उनके पार्टी बदलने को पंजाब में आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर आवला का पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने जलालाबाद से अपने पुराने राजनीतिक जुड़ाव और अकाली सरकारों के दौरान हुए विकास कार्यों का भी जिक्र किया।
सुखबीर बादल ने किया आवला का स्वागत
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पोस्ट में लिखा कि जलालाबाद से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रमिंदर सिंह आवला का अकाली दल में स्वागत करते हुए उन्हें खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि जलालाबाद के लोगों ने उन्हें तीन बार क्षेत्र की सेवा करने का अवसर दिया।
सुखबीर बादल ने अपने संदेश में अकाली सरकारों के कार्यकाल के दौरान विधानसभा क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। आवला के अकाली दल में शामिल होने से सीमावर्ती फिरोजपुर-फाजिल्का क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है।
राजा वड़िंग के टिकट संबंधी बयान के बाद बढ़ी थी चर्चा
रमिंदर सिंह आवला की कांग्रेस से नाराजगी की चर्चा उस समय तेज हुई थी, जब पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने परिवार के एक से अधिक सदस्यों को चुनावी टिकट देने के मुद्दे पर टिप्पणी की थी। 4 अगस्त को फिरोजपुर में एक जनसभा के दौरान वड़िंग ने कहा था कि बड़े नेता खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं और अपने बेटों के लिए भी टिकट मांगते हैं।
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उन्होंने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में एक परिवार को दो टिकट नहीं देने की बात कही थी और सवाल उठाया था, “बाप का राज है क्या?” इस बयान को राजनीतिक हलकों में रमिंदर सिंह आवला से जोड़कर देखा गया। हालांकि, आवला के अकाली दल में शामिल होने के पीछे यही एकमात्र कारण था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लोकसभा चुनाव में शेर सिंह घुबाया को टिकट देने पर भी हुआ था विवाद
फिरोजपुर में कांग्रेस के भीतर रमिंदर सिंह आवला और सांसद शेर सिंह घुबाया के बीच टिकट को लेकर खींचतान पहले भी चर्चा में रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले शेर सिंह घुबाया शिरोमणि अकाली दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें कांग्रेस का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध की खबरें सामने आई थीं।
रमिंदर सिंह आवला समेत कुछ स्थानीय नेताओं की नाराजगी भी उस समय चर्चा का विषय बनी थी। हालांकि, कांग्रेस हाईकमान ने घुबाया को लोकसभा चुनाव का टिकट दिया था। इस घटनाक्रम को फिरोजपुर क्षेत्र में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति के प्रमुख विवादों में गिना गया।
पंजाब की राजनीति में क्या होगा असर?
रमिंदर सिंह आवला का अकाली दल में शामिल होना जलालाबाद और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। पूर्व विधायक होने के कारण उनका स्थानीय राजनीतिक संपर्क और अनुभव अकाली दल के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम क्षेत्र में पार्टी संगठन और नेताओं के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि, इस बदलाव का चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, रमिंदर सिंह आवला के अकाली दल में शामिल होने से पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।