डेली संवाद, नई दिल्ली। Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
शाम को विधि-विधान से करवा माता की पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। साल 2026 में करवा चौथ की तारीख, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चांद निकलने के समय को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता है।
कब है करवा चौथ?
हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस साल करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत की शुरुआत करती हैं और रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ पर सरगी, सोलह श्रृंगार, करवा माता की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
कितने बजे निकलेगा चांद?
करवा चौथ के दिन चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व होता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 29 अक्टूबर 2026 को चांद रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर निकलने का अनुमान है।
यह भी पढ़ें: मैरिटन होटल को अवैध बताकर खाली करवाने वाले नगर निगम के अफसर हुए 'लाचार'
हालांकि, चंद्रोदय का वास्तविक समय शहर और भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के स्थानीय चंद्रोदय समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
करवा चौथ की पूजा विधि
करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को पूजा की तैयारी की जाती है।
शाम को पूजा स्थल पर करवा माता और भगवान गणेश की पूजा करें।
करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
पूजा में करवा, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और अन्य आवश्यक सामग्री अर्पित करें।
चंद्रमा निकलने पर उन्हें अर्घ्य दें और पति की लंबी उम्र तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
इसके बाद परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।
क्यों रखा जाता है करवा चौथ का व्रत?
करवा चौथ की पूजा में व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व है। प्रचलित कथा के अनुसार, वीरवती नाम की एक स्त्री ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था। व्रत के दौरान भूख-प्यास से व्याकुल होने पर उसके भाइयों ने छल से चंद्रमा निकलने का भ्रम पैदा कर दिया।
वीरवती ने चंद्रमा समझकर व्रत खोल लिया, जिसके बाद उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बाद में श्रद्धा और पूजा के प्रभाव से उसका वैवाहिक जीवन फिर सुखमय हुआ। यह कथा व्रत के प्रति आस्था, धैर्य और समर्पण का संदेश देती है। अलग-अलग क्षेत्रों में करवा चौथ की कथा के विभिन्न रूप प्रचलित हैं।
सरगी और सोलह श्रृंगार का महत्व
करवा चौथ पर सरगी खाने की परंपरा सुबह सूर्योदय से पहले निभाई जाती है। इसमें आमतौर पर फल, मिठाई, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं।
वहीं, सोलह श्रृंगार को सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं इस अवसर पर पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं और पूजा के दौरान अपने पति की लंबी उम्र तथा सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।