डेली संवाद, मानसा/बठिंडा। Punjab News: पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। केंद्र सरकार ने इस मामले में पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा से जवाब तलब करते हुए विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। केंद्र की ओर से जारी पत्र में घटना के संबंध में पूरी जानकारी और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्योरा देने को कहा गया है।
दूसरी ओर, परविंदर झोटा के परिवार और समर्थकों का धरना चौथे दिन भी जारी है। परिवार मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे, सीबीआई जांच सहित पांच मांगों पर अड़ा हुआ है। प्रशासन की ओर से परिवार के साथ कई बार बातचीत की गई, लेकिन अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है।
केंद्र ने पंजाब के मुख्य सचिव से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
परविंदर झोटा हत्याकांड को लेकर केंद्र सरकार ने पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को पत्र भेजकर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। पत्र में घटना से जुड़े तथ्यों और राज्य सरकार की ओर से अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि, केंद्र को रिपोर्ट भेजने की समयसीमा और राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब का विस्तृत ब्योरा सामने आना बाकी है।
चौथे दिन भी धरने पर बैठा परिवार, शव लेने से इनकार
परविंदर झोटा के परिवार और समर्थकों का धरना लगातार जारी है। मृतक के पिता भीम सिंह का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक परिवार बेटे का शव नहीं लेगा। परविंदर का शव मानसा के सिविल अस्पताल में रखा हुआ है और खबर के मुताबिक, अभी तक पोस्टमॉर्टम भी नहीं हुआ है।
परिवार ने मामले की सीबीआई जांच और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही सहित पांच मांगें रखी हैं। प्रशासन की ओर से परिवार को मनाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
19 अक्टूबर को AAP विधायकों और मंत्रियों के घरों के घेराव का ऐलान
इंसाफ कमेटी ने ऐलान किया है कि 19 अक्टूबर को पंजाब भर में आम आदमी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव किया जाएगा। कमेटी का कहना है कि जब तक परिवार को इंसाफ नहीं मिलता और उसकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस ऐलान के बाद आगामी दिनों में पंजाब में राजनीतिक गतिविधियां और विरोध प्रदर्शन तेज होने की संभावना है। हालांकि, प्रस्तावित घेराव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
13 अक्टूबर को गोली मारकर की गई थी परविंदर झोटा की हत्या
जानकारी के अनुसार, परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि नशा बेचने का विरोध करने पर मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार ने उन्हें गोली मार दी। पुलिस ने इस मामले में अश्विनी कुमार, उसकी पत्नी नीलम रानी और कथित तौर पर मदद करने वाले एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अश्विनी कुमार को सात दिन और उसकी पत्नी नीलम रानी को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हत्या के पीछे की परिस्थितियों और आरोपियों की भूमिका से जुड़े तथ्यों की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान आगजनी और तोड़फोड़ पर दो केस दर्ज
परविंदर झोटा की हत्या के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर पुलिस ने दो मामले दर्ज किए हैं। डीआईजी हरजीत सिंह के मुताबिक, इन मामलों में शामिल आरोपियों की पहचान कर ली गई है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हत्या के मामले में निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, पुलिस की ओर से प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की अलग से जांच की जा रही है।
मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की जांच, ड्रग इंस्पेक्टर से पूछताछ
हत्याकांड के आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार के लाइसेंस के नवीनीकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। संबंधित ड्रग इंस्पेक्टर नरेश की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज और मानसा के डिप्टी कमिश्नर ने मामले से संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है।
ड्रग इंस्पेक्टर से देर रात तक पूछताछ किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मेडिकल स्टोर के लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन हुआ था या नहीं। फिलहाल, ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
परविंदर झोटा हत्याकांड में आगे क्या?
परविंदर झोटा हत्याकांड में अब केंद्र सरकार की रिपोर्ट मांगने, परिवार के धरने और मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की जांच पर सबकी नजर है। परिवार अपनी मांगें पूरी होने तक शव लेने से इनकार कर रहा है, जबकि इंसाफ कमेटी ने 19 अक्टूबर को राज्यव्यापी घेराव का ऐलान किया है।
आने वाले दिनों में प्रशासन और परिवार के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन और तेज होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।