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Punjab News: किसानों ने चंडीगढ़-मनाली हाईवे पर दिया धरना, वाहनों की लगी लंबी कतारें

रोपड़ मंडी में हाइब्रिड धान की खरीद पर प्रति क्विंटल 5 किलो कटौती के विरोध में किसानों ने चंडीगढ़-मनाली हाईवे करीब 3 घंटे जाम रखा। किसानों ने कटौती को लूट बताते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

Punjab News: किसानों ने चंडीगढ़-मनाली हाईवे पर दिया धरना, वाहनों की लगी लंबी कतारें
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डेली संवाद, रोपड़ (रूपनगर)। Punjab News: पंजाब के रोपड़ में हाइब्रिड धान की खरीद पर प्रति क्विंटल 5 किलो कटौती के विरोध में किसानों ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने रोपड़ मंडी के पास चंडीगढ़-मनाली हाईवे जाम कर दिया। करीब 3 घंटे तक हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा, जिसके चलते दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

किसानों का आरोप है कि मंडी में सेलर मालिक हाइब्रिड धान खरीदने के लिए प्रति क्विंटल 5 किलो कटौती की शर्त रख रहे हैं। किसानों ने इस कटौती को अनुचित बताते हुए इसे सीधे तौर पर लूट करार दिया और मांग की कि बिना किसी कटौती के उनकी फसल की खरीद की जाए।

हाईवे पर किसानों का प्रदर्शन, पुलिस मौके पर पहुंची

किसानों के हाईवे जाम करने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसान नेताओं के साथ बातचीत शुरू की और मामले का समाधान निकालने का प्रयास किया।

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प्रशासन की ओर से मंडी में जमा धान की लिफ्टिंग के लिए गाड़ियां भेजने का आश्वासन भी दिया गया। हालांकि किसान संगठनों की बैठक के दौरान हाईवे पर यातायात बंद रहा।

15 दिन पहले तैयार हो गई थी फसल

पंजाब मोर्चा के कन्वीनर गौरव राणा ने कहा कि किसानों की धान की फसल करीब 15 दिन पहले ही तैयार हो चुकी थी, लेकिन अब खरीद के दौरान नई समस्याएं खड़ी की जा रही हैं। उन्होंने मंडी में खरीदे या जमा धान की समय पर लिफ्टिंग नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।

उनका कहना था कि किसान पहले ही फसल को मंडी तक लेकर आ चुके हैं और अब खरीद में कटौती की शर्त लगाना किसानों के साथ अन्याय है।

17 तारीख से अधिकारियों के संज्ञान में मामला

भारतीय किसान यूनियन बेरामके के उपाध्यक्ष तारणवीर सिंह सिद्धू ने कहा कि किसानों की यह समस्या 17 तारीख से ही अधिकारियों के संज्ञान में है, लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हाइब्रिड धान की खरीद पर की जा रही कथित 5 किलो प्रति क्विंटल कटौती का समाधान जल्द नहीं हुआ तो किसान आंदोलन को और तेज करेंगे।

किसानों ने स्पष्ट किया कि वे प्रति क्विंटल 5 किलो कटौती किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। फिलहाल प्रशासन और किसान संगठनों के बीच बातचीत के बाद मामले के समाधान का इंतजार है।