डेली संवाद, पठानकोट। Punjab News: पंजाब में वीरवार दोपहर से प्रदेशभर के 544 सेवा केंद्रों पर कामकाज ठप हो गया। सेवा केंद्र कर्मचारियों ने विभिन्न सेवाओं के नाम पर लगाए जा रहे भारी-भरकम जुर्माने के विरोध में प्रदर्शन करते हुए हड़ताल शुरू कर दी। कर्मचारियों का आरोप है कि आधार कार्ड और अन्य नागरिक सेवाओं में मामूली गलतियों या तकनीकी खामियों के आधार पर उन पर लाखों रुपये तक की पेनल्टी लगाई जा रही है।
सेवा केंद्र कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जसविंदर सिंह गिल ने हड़ताल की जानकारी देते हुए कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में आगे की रणनीति प्रदेश स्तरीय बैठक में तय की जाएगी।
544 सेवा केंद्रों पर सेवाएं प्रभावित, लोगों को हो सकती है परेशानी
पंजाब के 544 सेवा केंद्रों पर कामकाज बंद होने से सरकारी नागरिक सेवाओं के लिए आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिक विभिन्न सरकारी सेवाओं और दस्तावेजों से संबंधित कार्य करवाते हैं।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभागों और कंपनियों की ओर से लगाए जा रहे जुर्माने के कारण ऑपरेटरों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी के विरोध में उन्होंने कामकाज रोककर प्रदर्शन करने का फैसला लिया।
1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक पेनल्टी लगाने का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला प्रधान जसविंदर सैनी ने आरोप लगाया कि सेवा केंद्र ऑपरेटरों पर बिना उचित प्रक्रिया के 1 लाख रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक की पेनल्टी लगाई जा रही है। उनके अनुसार, इतनी बड़ी रकम का जुर्माना छोटे ऑपरेटरों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर रहा है।
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उनका कहना है कि इस तरह की पेनल्टी के चलते सेवा केंद्रों का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। कर्मचारी नेताओं ने दावा किया कि वे लंबे समय से पंजाब सरकार, डीजीआर (डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नेंस रिफॉर्म्स) और संबंधित कंपनियों के सामने अपनी समस्याएं रख रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ है।
आधार कार्ड और तकनीकी गलतियों पर पेनल्टी का विरोध
सेवा केंद्र कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जसविंदर सिंह गिल का आरोप है कि आधार कार्ड और अन्य नागरिक सेवाओं में मामूली त्रुटियों या तकनीकी कारणों का हवाला देकर ऑपरेटरों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि तकनीकी गलतियों और अन्य समस्याओं की समीक्षा निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए। उनका मानना है कि पेनल्टी लगाने से पहले उचित जांच और ऑपरेटरों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
CM भगवंत मान के हस्तक्षेप की मांग
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि पेनल्टी प्रक्रिया की समीक्षा कर ऑपरेटरों को राहत दी जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक मुख्यमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते और उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
शाम की बैठक में तय होगी अगली रणनीति
जसविंदर सिंह गिल के अनुसार, वीरवार शाम को यूनियन की प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मौजूदा हड़ताल और कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा के बाद आगामी रणनीति का ऐलान किया जाएगा।
यूनियन ने मांग की है कि कथित मनमानी पेनल्टी प्रणाली पर रोक लगाई जाए, पुरानी पेनल्टी रद्द की जाए और ऑपरेटरों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए। फिलहाल, हड़ताल आगे कितने समय तक जारी रहेगी और सेवा केंद्रों पर कामकाज कब बहाल होगा, इस बारे में यूनियन की अगली घोषणा का इंतजार है।