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Jalandhar News: मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना पुरानी गारंटियों की तरह सिर्फ़ एक भ्रम, फंडिंग और कार्यप्रणाली पर सरकार क्यों चुप– मनोरंजन कालिया

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डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: पंजाब सरकार द्वारा 65 लाख परिवारों के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, जिसके तहत लगभग 3 करोड़ लोगों को 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर देने का दावा किया जा रहा है, पहली नजर में भले ही जनहितैषी दिखाई देती हो, लेकिन वास्तव में यह योजना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। कारण यह है कि स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्टेट हेल्थ एजेंसी द्वारा केवल 1 लाख रुपये के बीमा कवर के हिसाब से ही प्रीमियम अदा किया जा रहा है। ऐसे में बाकी 9 लाख रुपये की राशि कहां से लाई जाएगी—यह आरोप पंजाब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनोरंजन कालिया ने आज जालंधर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान लगाए।

सरकार कैसे करेगी खर्च

उन्होंने कहा कि “आप सरकार” द्वारा शेष 9 लाख रुपये की राशि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है, जिससे यह साबित होता है कि इस राशि की भरपाई राज्य सरकार को अपने खजाने से करनी पड़ेगी। इसका सीधा असर राज्य के खजाने पर पड़ेगा। जब सरकार के पास बुजुर्गों और विधवाओं की पेंशन देने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं है, तो “आप सरकार” राज्य के खजाने से इतना बड़ा खर्च कैसे करेगी—यह बड़ा सवाल है।

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मनोरंजन कालिया ( Manoranjan Kalia ) ने कहा कि सरकार ने योजना की घोषणा तो बड़े जोर-शोर से कर दी है, लेकिन यह नहीं बताया कि यह योजना जमीनी स्तर पर किस तरह लागू होगी, कैशलेस इलाज की प्रक्रिया क्या होगी और अस्पतालों को भुगतान किस प्रकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की यह चुप्पी अपने आप में कई सवाल खड़े करती है।

इंश्योरेंस कंपनी के साथ एमओयू साइन

कालिया ने बताया कि 2 जनवरी को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह की मौजूदगी में यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ एक एमओयू साइन किया गया, जिसके अनुसार केवल 1 लाख रुपये के बीमा कवर के लिए ही प्रीमियम स्टेट हेल्थ एजेंसी द्वारा अदा किया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार 10 लाख रुपये तक के इलाज का दावा कर रही है, तो बाकी 9 लाख रुपये की जिम्मेदारी कौन निभाएगा। इस बारे में सरकार ने अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास वास्तव में पर्याप्त फंड उपलब्ध होते, तो पूरे 10 लाख रुपये का बीमा कवर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा दिया जाता, न कि केवल 1 लाख रुपये का। कालिया ने दावा किया कि यह योजना तमिलनाडु मॉडल की नकल है, जहां 2009 से लागू स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पूरे प्रीमियम का भुगतान राज्य सरकार करती है, जबकि पंजाब सरकार अपनी वित्तीय कमजोरी छिपाने की कोशिश कर रही है। मनोरंजन कालिया ने पंजाब की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य पर पहले ही 4.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चढ़ चुका है। पीएसपीसीएल को दी जाने वाली बिजली सब्सिडी के 10,500 करोड़ रुपये अभी तक बकाया हैं। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों का डीए नहीं दिया गया है और पीआरटीसी को भी सैकड़ों करोड़ रुपये का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में यह आशंका पूरी तरह जायज है कि यदि सरकार समय पर अस्पतालों को भुगतान नहीं कर पाई, तो अंततः मरीजों को अपनी जेब से पैसे देने पड़ेंगे। इससे कैशलेस इलाज का दावा सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। मनोरंजन कालिया ने कहा कि सरकार को विज्ञापनबाजी और बड़े-बड़े दावों की बजाय योजना की पूरी कार्यप्रणाली, फंडिंग मॉडल और भुगतान प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, अन्यथा यह योजना भी अन्य अधूरी गारंटियों की तरह जनता के साथ धोखा साबित होगी।