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GST Scam: 54 करोड़ का GST घोटाला, एक महिला समेत 3 बड़े कारोबारियों पर शिकंजा

GST Bogus Billing Scam
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डेली संवाद, हिसार। GST Scam: हरियाणा के हिसार में फ्यूचर मेकर कंपनी से जुड़े 54 करोड़ रुपए के GST घोटाले में फंसे कारोबारियों और अधिकारियों को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को बड़ा झटका दिया है। हिसार की अदालत में सुनवाई के दौरान राधेश्याम (Radheshyam) और बंसीलाल (Bansilal) की जमानत याचिका को जज राजीव की कोर्ट ने खारिज कर दिया। यह याचिका धारा 437(6) के तहत दायर की गई थी, जिसमें आरोपियों ने तर्क दिया था कि मामले में 60 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा नहीं हुआ है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि मामले की परिस्थितियों और कानूनी पहलुओं को देखते हुए इस स्तर पर राहत देना उचित नहीं है।

ट्रायल पूरा नहीं हुआ

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने जोर देकर कहा कि निर्धारित समय सीमा में ट्रायल पूरा नहीं हुआ है, इसलिए आरोपी जमानत के हकदार हैं। दूसरी ओर, शिकायत पक्ष के अधिवक्ता देवेंद्र वर्मा और अनिल खुराना ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना न्यायहित में नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों की नियमित जमानत याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसकी सुनवाई 4 मई को होनी है।

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कोर्ट में यह भी बताया गया कि हाईकोर्ट पहले ही उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की गई है। [caption id="attachment_73918" align="aligncenter" width="1200"] GST News GST News[/caption]

अंतरिम जमानत मिली

मामले में एक अन्य अहम पहलू यह है कि सीएमडी राधेश्याम को उनकी पत्नी के इलाज के आधार पर अंतरिम जमानत मिली हुई है, जिसके चलते वह फिलहाल जेल से बाहर हैं। उनकी अंतरिम जमानत बढ़ाने को लेकर आज एडीजे कोर्ट में भी अहम सुनवाई होगी। जांच एजेंसियों के अनुसार, फ्यूचर मेकर कंपनी पर आरोप है कि उसने देशभर में सदस्यता अभियान चलाकर लोगों से प्रति सदस्य 3750 रुपए वसूले। इस तरह करोड़ों रुपए जुटाए गए, लेकिन उस पर बनने वाला लगभग 54 करोड़ रुपए का GST सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया गया।

कोर्ट में आत्मसमर्पण

इनकम टैक्स और GST विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने एक बड़े नेटवर्क के जरिए लोगों को जोड़कर भारी रकम इकट्ठा की। नोटिस और वारंट जारी होने के बाद दोनों आरोपी 10 नवंबर 2025 को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर सबकी नजर आगामी सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली कार्यवाही पर टिकी हुई है।