डेली संवाद, जालंधर।
Jalandhar News: सर्वोदय अस्पताल (Sarvodya Hospital) मामले में कोर्ट ने अब आरोपी डॉ. कपिल गुप्ता पुत्र मित्तर पाल पर भी शिकंजा कस दिया है। कोर्ट ने डॉ. गुप्ता द्वारा पासपोर्ट रीन्यू करवाने के लिए लगाई गई अर्जी पर पूछा है कि क्या वो इस केस की जांच में शामिल हुए थे या नहीं।
साथ ही
पुलिस (Police)
से भी सख्त लहजे में जवाब मांगा गया है कि क्या SIT को डॉ. कपिल गुप्ता के पासपोर्ट के नवीनीकरण के आवेदन पर कोई आपत्ति है। यह सारी जानकारी जुटाकर कोर्ट में सबमिट करने की जिम्मेदारी नवी बारादरी के SHO को सौंपी गई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर रिपोर्ट पेश नहीं की गई तो SHO के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।
कोर्ट ने 15 अप्रैल को ही रिपोर्ट मांगी
ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या डॉक्टर कपिल गुप्ता ने इस केस में जमानत ली है या नहीं, क्योंकि वो भी डॉक्टर राजेश अग्रवाल, डॉक्टर अनवर इब्राहिम खान और नोएडा के CA संदीप कुमार सिंह सहित Non-Bailable अपराध के आरोपी हैं। जानकारी के अनुसार, यह केस राजबीर कौर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की कोर्ट में सुना गया।
कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी ने डॉ. कपिल गुप्ता द्वारा पासपोर्ट रीन्यूल पर आपत्ति उठाई है, इसलिए सारे तथ्य सामने आने चाहिए। हालाँकि, कोर्ट ने 15 अप्रैल को ही रिपोर्ट मांगी थी कि क्या कपिल गुप्ता जांच में शामिल हुए हैं या नहीं, लेकिन इस संबंध में अदालत को कोई जानकारी नहीं दी गई।
SHO के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
कोर्ट ने आदेश दिया कि आदेश की कॉपियां SHO को भेजी जाएँ ताकि 27 मई को उचित रिपोर्ट अदालत में पेश की जा सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सही रिपोर्ट नहीं दी गई तो SHO के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मालूम हो कि कपिल गुप्ता ने 27 मई से पहले पासपोर्ट रीन्यूल फाइल पर विचार करने के लिए एक आवेदन दिया था, जिसमें कहा गया कि थाना नवा बारादरी ने No Objection Report दे दी है और अब कोर्ट भी उन्हें No Objection Report दे। हालाँकि, कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि जब इस केस में SIT गठित है तो थाने से NOR कैसे जारी हो गई? किसने जारी की और किस आधार पर दी गई? हालांकि, रीडर ने कोर्ट को बताया कि मुख्य फाइल में पुलिस की NOR लगी हुई है।
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Medical Fraud Case in Jalandhar[/caption]
ADVOCATE VK SAREEN ने पुलिस पर ठीकरा फोड़ा
दूसरी तरफ डॉक्टर गुप्ता के ADVOCATE VK SAREEN ने कोर्ट को बताया कि पुलिस खुद ही डॉक्टर कपिल गुप्ता को जांच में शामिल नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अभी तक यह निर्णय नहीं लिया है कि आवेदक को जांच में शामिल किया जाना है या नहीं और वे इस संबंध में Affidavit भी दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी SIT की रिपोर्ट नहीं आई है, इसलिए उन्होंने कोर्ट से NOR के लिए अनुरोध किया।
कोर्ट ने कहा कि न्यायालय मानती है कि संबंधित अफसर की लिखित रिपोर्ट जरूरी है। यदि SIT गठित है तो आवेदक के जांच में शामिल होने अथवा न होने के संबंध में SIT की रिपोर्ट के बिना NOR जारी करने हेतु ADVOCATE के निवेदन पर पूर्णतः विश्वास नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि वह कपिल गुप्ता के विदेश यात्रा करने के अधिकार से अवगत है, लेकिन साथ ही किसी लंबित FIR के संबंध में जांच में सहयोग करना उनका कर्तव्य भी है।
कोर्ट ने SHO को Special Messenger बनाया
कोर्ट ने कहा कि यदि कपिल गुप्ता को जांच में शामिल करने की जरूरत नहीं है तो SIT इसे लिखित में दे और यदि उनको जान-बूझकर जांच में शामिल नहीं किया जा रहा है तो यह भी लिखित में बताया जाए।
इन बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सुनवाई Prepone करने को उचित नहीं माना। कोर्ट ने SIT से पूछा कि क्या कोई ऐसा सच या तथ्य है जिसे SIT इस आवेदन पर निर्णय लेने के लिए न्यायालय के नोटिस में लाना चाहती हो।
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Court[/caption]
न्यायालय में रिपोर्ट पेश नहीं हुई
SHO नवी बारादरी को इस आदेश की प्रति SIT तक पहुँचाने और रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए विशेष दूत (Special Messenger) नियुक्त किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि 27.05.2026 को न्यायालय में रिपोर्ट पेश नहीं हुई तो SHO और गठित SIT को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर रिपोर्ट न आने का कारण बताना होगा।
नायब कोर्ट को भी निर्देश दिए गए हैं कि आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इसे नवा बारादरी थाने तक पहुँचाया जाए। इस केस में FIR 233/23.12.25 को नवी बारादरी थाने में दर्ज हुई थी।