डेली संवाद, अहमदाबाद।
Blast In Factory: अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में शनिवार को एक अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में 8 कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि करीब 15 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसकी आवाज लगभग 5 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। हादसे के समय फैक्ट्री में करीब 25 कर्मचारी काम कर रहे थे।
यह दुर्घटना रामोल से गटराड जाने वाले मार्ग पर महमूदपुरा टैलेंट के पास स्थित एक खुले मैदान में हुई, जहां पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। घटनास्थल के समीप रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) का कैंप भी मौजूद है। धमाके की आवाज सुनते ही RAF के जवान मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। इसके बाद दमकल विभाग की कई गाड़ियां और एम्बुलेंस भी घटनास्थल पर पहुंचीं। घायलों को तत्काल एलजी अस्पताल और असरवा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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Blast In Cracker Factory in Ahmedabad[/caption]
लाइसेंस रद्द होने के बावजूद फैक्ट्री कैसे चलती रही?
जॉइंट पुलिस कमिश्नर जयपाल सिंह राठौड़ के अनुसार, मेहुल डोडिया नामक व्यक्ति इस पटाखा फैक्ट्री का संचालन कर रहा था। जांच में सामने आया कि फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका था, इसके बावजूद यहां अवैध रूप से पटाखों का निर्माण जारी था। खुले मैदान में तिरपाल और पत्तों की अस्थायी बाड़ बनाकर विस्फोटक सामग्री तैयार की जा रही थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फैक्ट्री के संचालन में हुई लापरवाही की भी पड़ताल की जा रही है।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि लाइसेंस रद्द होने के बावजूद फैक्ट्री कैसे चलती रही। नियमों के अनुसार, लाइसेंस निरस्त होने पर प्रशासन को फैक्ट्री सील कर वहां मौजूद बारूद और विस्फोटक सामग्री जब्त करनी चाहिए थी, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। इसके चलते गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की आशंका जताई जा रही है।
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8 कर्मचारियों की मौत; प्रशासन पर उठे बड़े सवाल
एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि RAF जैसे अर्धसैनिक बल के कैंप के पास पटाखा फैक्ट्री कैसे संचालित हो रही थी। गृह मंत्रालय के नियमों के अनुसार सैन्य और अर्धसैनिक प्रतिष्ठानों के आसपास विस्फोटक सामग्री से जुड़ी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद यहां अवैध फैक्ट्री का संचालन सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पटाखों में पोटेशियम नाइट्रेट, सल्फर, चारकोल और एल्युमिनियम पाउडर जैसे अत्यंत ज्वलनशील रसायन होते हैं। गर्मी, चिंगारी या स्टैटिक बिजली के संपर्क में आते ही इनमें आग लग सकती है और फिर कुछ ही सेकंड में चेन रिएक्शन के कारण लगातार विस्फोट होने लगते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये तथा घायलों के समुचित उपचार का आश्वासन दिया है। प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।