डेली संवाद, जालंधर। Punjab News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पंजाब के DGP को भेजे गए पत्रों में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों की कथित भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए CBI की FIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन संबंधित मामले में किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। ऐसे में जांच जारी रहने के साथ-साथ अदालत की अगली कार्यवाही भी महत्वपूर्ण हो गई है।
ED के पत्रों में ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी मंजूरियों से जुड़े आरोप
रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान पंजाब के DGP गौरव यादव को तीन पत्र भेजे थे। इनमें कथित तौर पर अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, सरकारी टेंडर, लाइसेंस, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव (CLU) और अन्य सरकारी मंजूरियों से जुड़े मामलों में अनुचित लाभ लेने के आरोपों का उल्लेख किया गया था।
ED के इनपुट के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए CBI को FIR दर्ज करने और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
राजबीर घुम्मन और अन्य लोगों की भूमिका की जांच
जांच एजेंसियों के आरोपों के अनुसार, नितिन गोहल नामक व्यक्ति कथित तौर पर राजबीर सिंह घुम्मन और सरकारी काम करवाने के इच्छुक लोगों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता था। मामले में अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं।
ED की ओर से कथित व्हाट्सऐप चैट और डिजिटल साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसियां इन आरोपों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी फैसलों और प्रशासनिक मंजूरियों को प्रभावित करने के बदले किसी तरह का अनुचित लाभ लिया गया था या नहीं। इन आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना अभी बाकी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने दर्ज की FIR
5 अक्टूबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ED की ओर से सामने रखी गई सामग्री पर विचार करने के बाद CBI को मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। इसके बाद CBI ने राजबीर सिंह घुम्मन और अन्य लोगों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला दर्ज किया।
CBI ने मामले की जांच के तहत चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय सहित कई स्थानों पर तलाशी भी ली थी। इस कार्रवाई को लेकर पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए।
सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत, लेकिन FIR पर रोक नहीं
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने CBI की FIR पर रोक लगाने से इनकार करते हुए निर्देश दिया कि मामले में कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाए। अदालत ने पंजाब सरकार से जांच में सहयोग करने को भी कहा।
इस आदेश का अर्थ है कि जांच पर पूरी तरह रोक नहीं लगी है, लेकिन संबंधित मामले में कठोर कदम उठाने पर अंतरिम पाबंदी है। अब आगे की सुनवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।
आगे क्या होगा?
राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े मामले में ED की ओर से दिए गए इनपुट, CBI की जांच और सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण मामला चर्चा में है। जांच एजेंसियों को आरोपों से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल करनी है। वहीं, अदालत में आगे होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
महत्वपूर्ण: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में FIR दर्ज करने की कार्रवाई CBI ने की थी, जबकि ED ने कथित भ्रष्टाचार से जुड़े इनपुट दिए थे। इसलिए ED द्वारा जालंधर में अलग से नया केस दर्ज किए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे तथ्य के रूप में प्रकाशित नहीं करना चाहिए।