डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे करीब 180 ETT शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को चंडीगढ़ में प्रदर्शन किया। शिक्षक सेक्टर-30 में एकत्र हुए और वहां से आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया के सेक्टर-39 स्थित आवास की ओर जाने लगे।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, वे शांतिपूर्वक उनसे मिलकर अपनी समस्याएं बताना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोक दिया। शिक्षकों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में कुछ शिक्षक सड़क पर लेट गए और सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
सिसोदिया के आवास की ओर जा रहे थे शिक्षक
ETT शिक्षकों का कहना है कि वे किसी तरह का विवाद या टकराव पैदा करने नहीं आए थे। उनका उद्देश्य सरकार के प्रतिनिधि से मिलकर नौकरी, वेतन और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अपनी बात रखना था।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कई शिक्षक अपने परिवार और बच्चों के साथ चंडीगढ़ पहुंचे थे। उनका कहना है कि वे लंबे समय से अधिकारियों और मंत्रियों से मुलाकात कर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।
पुलिस कार्रवाई के विरोध में सड़क पर लेटे शिक्षक
शिक्षकों ने पुलिस द्वारा रोके जाने के विरोध में सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें सिसोदिया के आवास तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया और इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई।
शिक्षकों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक अपनी मांगें सरकार के सामने रखना चाहते हैं और बातचीत के जरिए समस्या का समाधान चाहते हैं।
वेतन विसंगति दूर करने की प्रमुख मांग
ETT शिक्षकों की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगति दूर करना और समान बैच के अन्य शिक्षकों के बराबर पंजाब सरकार का पे-स्केल लागू करना शामिल है।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें केंद्रीय 7वें वेतन आयोग के स्केल के आधार पर वेतन मिल रहा है, जबकि उसी भर्ती से जुड़े अन्य शिक्षकों को पंजाब सरकार के पे-स्केल का लाभ मिल रहा है। शिक्षकों के अनुसार, इससे उनकी सैलरी में काफी अंतर पैदा हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि मौजूदा वेतन में महंगाई के दौर में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। इसी कारण वे लंबे समय से पे-स्केल में समानता और वेतन संबंधी विसंगतियां दूर करने की मांग उठा रहे हैं।
2016 की ETT भर्ती से जुड़ा मामला
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का मामला वर्ष 2016 की ETT भर्ती से जुड़ा बताया जा रहा है। शिक्षकों के अनुसार, यह भर्ती पिछली SAD-BJP सरकार के समय हुई थी। बाद में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों के बीच कुछ शिक्षकों को नौकरी से हटाया गया था और बाद में अदालत के आदेश के बाद उनकी बहाली हुई।
शिक्षकों का दावा है कि भर्ती और सेवा शर्तों से जुड़े कुछ मुद्दे अभी भी लंबित हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि बाद की एक IAS रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के लिए शिक्षा विभाग के एक क्लर्क की गलती की ओर इशारा किया गया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
22 अगस्त को भी किया था प्रदर्शन
ETT शिक्षकों ने इससे पहले 22 अगस्त को पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के चंडीगढ़ स्थित आवास के बाहर प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई थी।
अब एक बार फिर शिक्षक चंडीगढ़ में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर बातचीत नहीं करती और वेतन विसंगति सहित अन्य मुद्दों का समाधान नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षकों का सरकार से सवाल
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं और सरकार का हिस्सा हैं। ऐसे में अपनी नौकरी, वेतन और सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने का अवसर मिलना चाहिए।
शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए।