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Punjab News: नगर निगम की बैठक में पार्षदों और अफसरों में टकराव, पार्षद का कुर्ता फटा; गेट पर धरने पर बैठे

लुधियाना नगर निगम के जनरल हाउस की बैठक में सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी पार्षदों के विरोध के बीच मेयर ने पार्षदों के माइक बंद करवा दिए और हंगामा करने वाले पार्षदों को बाहर निकालने के आदेश दिए।

Punjab News: नगर निगम की बैठक में पार्षदों और अफसरों में टकराव, पार्षद का कुर्ता फटा; गेट पर धरने पर बैठे
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डेली संवाद, लुधियाना। Punjab News: लुधियाना नगर निगम के जनरल हाउस की बैठक में सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी पार्षदों के विरोध के बीच मेयर ने पार्षदों के माइक बंद करवा दिए और हंगामा करने वाले पार्षदों को बाहर निकालने के आदेश दिए। हालांकि, मेयर के आदेश के बावजूद पुलिस ने पार्षदों को बाहर नहीं निकाला। इस दौरान धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनी और एक पार्षद का कुर्ता फट गया। पुलिस ने भाजपा पार्षद गौरवजीत गोरा को उठाया।

बैठक के दौरान पार्षदों और नगर निगम अधिकारियों के बीच भी तीखी बहस हुई। विवाद बढ़ने पर नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर जसकरण सिंह सेखो सहित कई अधिकारी और कर्मचारी बैठक छोड़कर बाहर चले गए। निगम कर्मियों ने बैठक का बायकॉट कर दिया। इसके बाद पार्षदों ने नगर निगम के गेट पर धरना लगा दिया।

भाजपा पार्षद भवनीत कौर और इंस्पेक्टर निशु घई में विवाद

बैठक में भाजपा पार्षद भवनीत कौर और सेंट्रल इंस्पेक्टर निशु घई के बीच तीखी बहस हुई। भवनीत कौर ने आरोप लगाया कि निशु घई उनके इलाके में फिजिकल तौर पर ड्यूटी पर नहीं रहते। उन्होंने अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

दूसरी ओर, निशु घई का कहना था कि बैठक के दौरान पार्षद ने उनसे बदतमीजी से बात की और उन्हें 'तुम' कहकर संबोधित किया। इसी बात से नाराज होकर उन्होंने बैठक का बायकॉट करने का फैसला किया। विवाद बढ़ने के बाद एडिशनल कमिश्नर जसकरण सिंह सेखो बैठक से बाहर आ गए। उनके साथ नगर निगम के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी वॉकआउट कर गए।

AAP पार्षदों ने अधिकारियों को सस्पेंड करने की मांग की

अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठक छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी की पार्षद अमृत वर्षा रामपाल ने नगर निगम कमिश्नर और मेयर से मांग की कि जो अधिकारी और कर्मचारी हाउस की बैठक छोड़कर बाहर गए हैं, उन्हें सस्पेंड किया जाए। AAP पार्षद तनवीर धालीवाल ने भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई।

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उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने हाउस की मर्यादा भंग की है। बैठक के बाद पार्षदों ने निगम के गेट पर धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया। AAP की पार्षद निधि गुप्ता ने भी अधिकारियों पर सियासत करने के आरोप लगाए। उनका कहना था कि अधिकारियों के रवैये के कारण नगर निगम की बैठक प्रभावित हुई है।

82 करोड़ रुपये के सड़क सफाई टेंडर पर पहले से विवाद

नगर निगम की बैठक में शहर की सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग के लिए प्रस्तावित करीब 82 से 82.5 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर भी विवाद चल रहा है। विपक्षी पार्षद इस प्रस्तावित ठेके का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस पार्षद और फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट्स कमेटी के सदस्य गौरव भट्टी शनिवार को नकली नोटों से भरी बोरी लेकर बैठक में पहुंचे थे।

उन्होंने मेयर इंद्रजीत कौर को नकली नोट सौंपते हुए प्रस्तावित टेंडर रद्द करने की मांग की थी। पुलिस ने उन्हें बैठक हॉल के प्रवेश द्वार पर रोकने की कोशिश की, लेकिन वह बोरी लेकर अंदर पहुंच गए। गौरव भट्टी का कहना था कि शहर के लिए व्यावहारिक नहीं माने जा रहे इस टेंडर के जरिए जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

दिल्ली की कंपनी को सड़कें धोने का ठेका देने पर सवाल

AAP पार्षद महक टीना के पति गुरकरण टीना ने भी प्रस्तावित टेंडर पर सवाल उठाए थे। उनके मुताबिक, नगर निगम की बैठक में दिल्ली की एक कंपनी को हाईप्रेशर पानी से शहर की सड़कों की सफाई का ठेका देने के लिए वर्क ऑर्डर पास करने की तैयारी थी। उन्होंने दावा किया कि टेंडर में सड़क की श्रेणी के हिसाब से सफाई की दरें तय की गई हैं।

उनके अनुसार, बाइपास के एक हिस्से के लिए 2,500 रुपये प्रति किलोमीटर, सिंगल सड़क के लिए 5,000 रुपये प्रति किलोमीटर और फोरलेन सड़क के लिए 10,000 रुपये प्रति किलोमीटर तक खर्च का प्रावधान बताया गया है। गुरकरण टीना ने इन दरों को काफी ज्यादा बताते हुए कहा कि जनता के पैसे का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए।

थापर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट को लेकर भी उठे सवाल

गुरकरण टीना ने दावा किया कि जब कंपनी ने टेंडर के लिए आवेदन किया था, तब नगर निगम ने थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से इस तकनीक के बारे में राय मांगी थी। उनके मुताबिक, संस्थान की रिपोर्ट में पानी से सड़कों की सफाई को लेकर नकारात्मक टिप्पणी की गई थी।

उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में पानी और सड़क पर बिछाई जाने वाली लुक के बीच प्रतिकूल प्रभाव की आशंका जताई गई थी। उनका कहना था कि यदि पानी के इस्तेमाल से सड़कों को नुकसान पहुंचने की आशंका है, तो इस तरह के ठेके पर आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए। हालांकि, रिपोर्ट और टेंडर से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

पूर्व पार्षद ममता आशु ने भी उठाए सवाल

पूर्व पार्षद ममता आशु ने भी सड़कों की सफाई के लिए निजी कंपनी को ठेका देने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि सड़कों की रोजाना धुलाई से पानी की बर्बादी हो सकती है, जबकि भूजल स्तर पहले ही चिंता का विषय है।

उन्होंने नगर निगम से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि सड़कें धोने के लिए किस तरह के पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने दूसरी नगर निगमों में मैकेनिकल स्वीपिंग के लिए अपनाई जा रही दरों की तुलना सार्वजनिक करने की मांग भी की, ताकि प्रस्तावित खर्च की उचितता का आकलन किया जा सके।

1208 सफाई कर्मचारियों की सेवा बढ़ाने के प्रस्ताव का भी विरोध

नगर निगम की बैठक में 1208 सफाई कर्मचारियों की सेवा एक साल बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विवाद हुआ। महिला पार्षद भूपिंदर कौर ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि वह पिछले एक साल से अधिकारियों को पत्र लिखकर कर्मचारियों का रिकॉर्ड मांग रही हैं।

उनके मुताबिक, कुछ कर्मचारी मौके पर काम करते हुए दिखाई नहीं देते। उन्होंने बैठक हॉल के बाहर व्हीलचेयर पर बैठकर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध भी जताया था। भूपिंदर कौर ने चेतावनी दी थी कि यदि सोमवार को हाउस में यह प्रस्ताव पास किया गया, तो वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।

पार्षद उषा कल्याण के निधन के कारण स्थगित हुई थी बैठक

गौरतलब है कि वार्ड नंबर 47 से आम आदमी पार्टी की पार्षद उषा कल्याण का निधन हो गया था। वह कैंसर से पीड़ित थीं और एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन के बाद शनिवार को होने वाली नगर निगम हाउस की बैठक स्थगित कर सोमवार तक के लिए टाल दी गई थी।

शनिवार को पार्षद गुरु नानक देव भवन में बैठक के लिए पहुंचे थे। बैठक शुरू होने से पहले ही कांग्रेस पार्षदों ने सड़क सफाई के प्रस्तावित टेंडर के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसके बाद सोमवार की बैठक में भी कई मुद्दों पर विरोध देखने को मिला।

लुधियाना नगर निगम की बैठक में हुए हंगामे ने सड़क सफाई के महंगे टेंडर, सफाई कर्मचारियों की सेवा बढ़ाने और अधिकारियों की जवाबदेही जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि निगम प्रशासन इन विवादों पर क्या कार्रवाई करता है और प्रस्तावित टेंडरों व कर्मचारियों से जुड़े सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।