डेली संवाद, जालंधर।
Punjab Roadways Strike: पंजाब में सरकारी परिवहन सेवाओं पर बड़ा असर पड़ने जा रहा है। जालंधर के पनबस और पंजाब रोडवेज के डिपो-1 और डिपो-2 से आज बसों का संचालन प्रभावित रहेगा। पनबस की किलोमीटर स्कीम में प्राइवेट प्लेयर को शामिल किए जाने के विरोध में ड्राइवर और कंडक्टरों ने काम छोड़कर अपने-अपने डिपो में धरना देने का फैसला किया है। वहीं, कच्चे कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार पहले यह हड़ताल 22 से 24 जून तक प्रस्तावित थी, लेकिन 9 जून को चंडीगढ़ में किलोमीटर स्कीम के तहत नई वॉल्वो बसों को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद कर्मचारियों में भारी नाराजगी फैल गई। इसी कारण कर्मचारियों ने तय कार्यक्रम से पहले ही आंदोलन शुरू कर दिया।
आज से नहीं चलेगी बसें
पीआरटीसी और पनबस के संविदा कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। बुधवार 10 जून को दोपहर 12 बजे से पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारी भी पूरी तरह काम बंद करेंगे। इससे पंजाब के विभिन्न जिलों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है।
पीआरटीसी डिपो-1 के प्रधान विक्रमजीत सिंह ने कहा कि कच्चे कर्मचारी पिछले एक साल से अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन से लगातार बातचीत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में किलोमीटर स्कीम बसों का विरोध, कच्चे कर्मचारियों को नियमित करना तथा निलंबित और बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली शामिल है।
सीएम आवास का घेराव करेंगे
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार सरकारी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की बजाय प्राइवेट बस ऑपरेटरों को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना है कि पंजाब रोडवेज के इतिहास में पहली बार पनबस में किलोमीटर स्कीम के तहत प्राइवेट बसों को शामिल किया जा रहा है। इससे सरकारी कर्मचारियों और परिवहन व्यवस्था दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 11 जून को मुख्यमंत्री आवास (सीएम कोठी) का घेराव किया जाएगा। कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनकी हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रह सकती है।
यात्रियों को परेशानी
दो बड़े परिवहन कर्मचारी संगठनों के एक साथ आंदोलन में आने से पंजाब भर में यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बस सेवाएं बाधित होने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों पर सबसे अधिक असर पड़ने की संभावना है।