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Punjab News: विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान: 15 करोड़ भारतीयों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता की आवश्यकता

Dr. Balbir Singh
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के तहत उपलब्ध कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज के कारण पंजाब में अब अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित बीमारियों का इलाज करवा रहे हैं। यह जानकारी साझा करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने आज कहा कि इस योजना का उद्देश्य इलाज में आने वाली आर्थिक बाधाओं को कम करना और लोगों को समय पर इलाज के लिए प्रेरित करना है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत सिज़ोफ्रेनिया, डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर, एंग्जाइटी डिसऑर्डर, तनाव से जुड़ी समस्याओं और नशाखोरी से संबंधित मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों सहित कई मानसिक रोगों का इलाज शामिल है। उन्होंने कहा, "सरकारी अस्पतालों में इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ईसीटी), ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन जैसी उन्नत इलाज सुविधाएँ और आवश्यक जाँच विधियाँ भी स्वीकृत पैकेज के तहत कवर की जाती हैं।"

मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती

भारत में मानसिक स्वास्थ्य आज भी एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (निमहांस, 2016) के अनुसार देश में लगभग 15 से 20 करोड़ लोग डिप्रेशन, एंग्जाइटी और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालाँकि समाज के नकारात्मक दृष्टिकोण, जागरूकता की कमी और खासकर ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी के कारण बहुत से लोग अभी भी समय पर इलाज नहीं करवा पाते। [caption id="attachment_16704" align="alignnone" width="1200"] Bhagwant Mann Bhagwant Mann[/caption]

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डा. बलबीर सिंह ने कहा, "मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के बराबर प्राथमिकता मिलनी चाहिए। डिप्रेशन, सिज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर और एंग्जाइटी जैसी बीमारियों का प्रभावी इलाज संभव है, इसलिए लोगों को विशेषज्ञ सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। बढ़ती जागरूकता, सेवाओं की बेहतर उपलब्धता और मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा के कारण अधिक मरीज़ बीमारी के शुरुआती चरण में ही इलाज के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे रोग की पहचान और इलाज में होने वाली देरी कम हो रही है।" उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित लक्षण महसूस करने वाले लोगों को समय पर सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में इलाज करवाने की अपील की और कहा कि शुरुआती इलाज से लंबी अवधि की जटिलताओं से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया, "मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत राज्य के सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध 2300 प्रक्रियाओं में से 81 प्रक्रियाएँ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी पैकेज के लिए आरक्षित हैं।"

शांत मन ही स्वस्थ हृदय का आधार

डा. सिंह ने यह भी साझा किया, "तनाव, डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी समस्याएँ अक्सर हमारी दैनिक जीवनशैली से जुड़ी होती हैं। 'सीएम दी योगशाला' के माध्यम से हम योग को मानसिक स्वास्थ्य, भावनाओं के संतुलन और स्वस्थ जीवन के लिए एक प्रभावी साधन के रूप में बढ़ावा दे रहे हैं। शांत मन ही स्वस्थ हृदय का आधार होता है और हम सब मिलकर एक स्वस्थ पंजाब का निर्माण कर रहे हैं।" राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के आँकड़ों के अनुसार अब तक 457 लाभार्थी सरकारी अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य पैकेजों के तहत इलाज करवा चुके हैं। इन सेवाओं के अंतर्गत अब तक लगभग 55 लाख रुपये के दावों का निपटारा किया जा चुका है।

धीरे-धीरे बढ़ रही जागरूकता

सिविल अस्पताल, बरनाला के सलाहकार मनोचिकित्सक डा. गगनदीप सेखों ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "लोग अब यह समझने लगे हैं कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ भी अन्य शारीरिक बीमारियों की तरह ही हैं और इनके लिए समय पर इलाज जरूरी है। पहले सामाजिक कलंक और आर्थिक तंगी के कारण लोग मदद लेने से कतराते थे।" डा. गगनदीप सेखों ने बताया कि शैक्षणिक दबाव, रोजगार की अनिश्चितता, आर्थिक तनाव, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग और सामाजिक सहयोग की कमी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा, "18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोग विशेष रूप से अधिक संवेदनशील हैं क्योंकि वे जीवन के कई महत्वपूर्ण बदलावों से गुज़र रहे होते हैं। उच्च शिक्षा का दबाव, रोजगार की अनिश्चितता, कार्यस्थल का तनाव, रिश्तों से जुड़ी चुनौतियाँ और बढ़ती आर्थिक जिम्मेदारियाँ उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।"

आवश्यक साधन अधिकतर उपलब्ध नहीं

उन्होंने आगे कहा कि तेज़ रफ्तार जीवनशैली, कम होता पारिवारिक मेल-जोल, डिजिटल माध्यमों का लगातार बढ़ता उपयोग और कामकाज से जुड़ा तनाव मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि के मुख्य कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा, "युवा सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि वे एक साथ शिक्षा, रोजगार, रिश्तों और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे होते हैं, जबकि उनके पास इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक साधन अधिकतर उपलब्ध नहीं होते।" डा. गगनदीप सेखों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत उपलब्ध कैशलेस इलाज सुविधा ने और अधिक लोगों को अस्पतालों में परामर्श और इलाज के लिए आने के लिए उत्साहित किया है। उन्होंने कहा, "समय पर हस्तक्षेप बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने और जटिलताओं को रोकने के लिए बहुत जरूरी है।"