Skip to content

US H-1B Visa: अमेरिका में H-1B वीजा पर बड़ा झटका! ट्रंप प्रशासन के नए प्लान से भारतीय प्रोफेशनल्स और IT कंपनियों की बढ़ेगी मुश्किल

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) के रेगुलेटरी एजेंडा के मुताबिक, नए नियमों के तहत H-1B और L-1 वीजा बढ़ाने वाली याचिकाओं पर भी अतिरिक्त फीस लागू की जा सकती है।

US H-1B Visa: अमेरिका में H-1B वीजा पर बड़ा झटका! ट्रंप प्रशासन के नए प्लान से भारतीय प्रोफेशनल्स और IT कंपनियों की बढ़ेगी मुश्किल
Share Facebook X WhatsApp Telegram Email
View in ePaper

डेली संवाद, अमेरिका। US H-1B Visa: अमेरिका (America) में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन H-1B और L-1 वर्क वीजा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत वीजा एक्सटेंशन (अवधि बढ़ाने) की प्रक्रिया को महंगा किया जा सकता है। इसका सीधा असर उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ सकता है, जो विदेशी कुशल कर्मचारियों पर निर्भर हैं। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स भी शामिल हैं।

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) के रेगुलेटरी एजेंडा के मुताबिक, नए नियमों के तहत H-1B और L-1 वीजा बढ़ाने वाली याचिकाओं पर भी अतिरिक्त फीस लागू की जा सकती है। इसमें 9/11 रिस्पॉन्स फीस और बायोमेट्रिक एंट्री-एग्जिट सिस्टम से जुड़ी फीस शामिल हो सकती है।

मौजूदा नियमों में क्या है प्रावधान?

फिलहाल अमेरिका में उन कंपनियों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है, जिनके पास 50 से ज्यादा कर्मचारी हैं और उनमें से आधे से अधिक H-1B या L-1 वीजा धारक हैं। ऐसी कंपनियों को नई H-1B याचिका दाखिल करने या कर्मचारी बदलने की स्थिति में अतिरिक्त फीस देनी होती है।

मौजूदा व्यवस्था में H-1B याचिकाओं के लिए 4,000 डॉलर और L-1 याचिकाओं के लिए 4,500 डॉलर तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है। अब DHS नियमों में बदलाव कर यह स्पष्ट करने की तैयारी कर रहा है कि यह फीस वीजा एक्सटेंशन की याचिकाओं पर भी लागू होगी।

इमिग्रेशन खर्च बढ़ेगा

H-1B वीजा आमतौर पर तीन साल की शुरुआती अवधि के लिए दिया जाता है, जिसके बाद कर्मचारी को इसे आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में नई फीस व्यवस्था लागू होने पर विदेशी कर्मचारियों को रखने वाली कंपनियों का इमिग्रेशन खर्च काफी बढ़ सकता है।

भारतीय कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि H-1B एक्सटेंशन पाने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है।

भारतीयों के बाद चीन के नागरिक H-1B मंजूरी पाने वालों में दूसरे स्थान पर रहे।

आईटी कंपनियों पर बढ़ सकता आर्थिक दबाव

नई फीस व्यवस्था लागू होने पर उन कंपनियों को सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है, जो बड़ी संख्या में H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में नौकरी जारी रखने के लिए मंजूर हुई H-1B याचिकाओं में अमेजन सबसे आगे रही। इसके बाद टीसीएस, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, एप्पल और गूगल जैसी कंपनियों का नाम शामिल है।