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Punjab News: पंजाब यूनिवर्सिटी में Ex CM चन्नी की परीक्षा को लेकर विवाद, देवेश मौदगिल ने UMC लगाने और परीक्षा रद्द करने की मांग की

पंजाब यूनिवर्सिटी में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की एमए लोक प्रशासन परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मेयर देवेश मौदगिल ने परीक्षा कक्ष की तस्वीर सामने आने पर UMC दर्ज करने, परीक्षा रद्द करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Punjab News: पंजाब यूनिवर्सिटी में Ex CM चन्नी की परीक्षा को लेकर विवाद, देवेश मौदगिल ने UMC लगाने और परीक्षा रद्द करने की मांग की
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की एमए लोक प्रशासन की परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट एवं सिंडिकेट सदस्य देवेश मौदगिल ने परीक्षा व्यवस्था और नियमों के समान अनुपालन पर सवाल उठाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

देवेश मौदगिल ने पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर एवं भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, वाइस चांसलर मीनाक्षी गोयल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र भेजा है।

चन्नी पर UMC लगाने और परीक्षा रद्द करने की मांग

देवेश मौदगिल ने मांग की है कि यदि जांच में परीक्षा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ Unfair Means Case (UMC) दर्ज किया जाए। उन्होंने परीक्षा रद्द करने और नियमों के तहत निर्धारित अवधि के लिए किसी भी परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित करने की मांग भी की है।

मौदगिल के अनुसार, 21 अगस्त को एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित तस्वीर में चरणजीत सिंह चन्नी परीक्षा कक्ष के अंदर परीक्षा देते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि परीक्षा केंद्र के अंदर फोटो किसने खींची, किस डिवाइस से खींची गई और वह उपकरण परीक्षा केंद्र के अंदर कैसे पहुंचा।

मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर प्रतिबंध का उठाया मुद्दा

देवेश मौदगिल ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी की परीक्षा व्यवस्था के तहत परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, कैमरा, स्मार्टवॉच, ईयरफोन, टैबलेट, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित होते हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा कि तस्वीर सामने आने के बाद तत्काल जांच क्यों नहीं की गई और यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो इसके पीछे क्या कारण रहा।

चन्नी को विशेष परीक्षा की अनुमति पर भी सवाल

मौदगिल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को विशेष अवसर दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने विश्वविद्यालय से स्पष्ट करने की मांग की कि यदि चन्नी ने निर्धारित समय पर होने वाली परीक्षा नहीं दी थी तो उन्हें विशेष अवसर किस नियम, श्रेणी और आधार पर दिया गया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि विशेष अवसर चिकित्सकीय कारण, खेल, NCC, NSS, परीक्षा तिथियों के टकराव या किसी अन्य निर्धारित श्रेणी के तहत दिया गया था।

इसके साथ ही उन्होंने परीक्षा क्रमांक, विशेष अवसर के लिए किए गए आवेदन, कारण, संबंधित श्रेणी और मंजूरी देने वाले सक्षम अधिकारी की जानकारी नियमों के अनुसार सार्वजनिक करने की मांग की।

परीक्षा केंद्र की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित करने की मांग

देवेश मौदगिल ने 20 अगस्त की परीक्षा से संबंधित परीक्षा केंद्र की CCTV रिकॉर्डिंग को तत्काल सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि रिकॉर्डिंग से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि परीक्षा केंद्र और परीक्षा कक्ष में कौन-कौन लोग गए और क्या किसी प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को अंदर ले जाया गया।

सभी विद्यार्थियों पर समान नियम लागू करने की मांग

पूर्व मेयर ने कहा कि यदि किसी सामान्य विद्यार्थी के पास परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन या अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुचित साधन संबंधी नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है और परीक्षा रद्द की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के मामले में भी विश्वविद्यालय को वही नियम समान रूप से लागू करने चाहिए।

'परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल'

देवेश मौदगिल ने कहा कि यह मामला केवल एक विद्यार्थी या पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़ा नहीं है, बल्कि पंजाब यूनिवर्सिटी की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और विद्यार्थियों के साथ समान व्यवहार से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी रसूखदार व्यक्ति को नियमों से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए।