डेली संवाद, बठिंडा। Punjab News: बठिंडा नगर निगम में प्रीमिक्स और इंटरलॉकिंग टाइलों के टेंडरों को लेकर चल रहे विवाद के बीच मेयर पदमजीत सिंह मेहता ने अपना पक्ष रखा। मेयर ने छोटे ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर किए जाने के आरोपों को गलतफहमी बताया।
मेयर ने कहा कि निगम का उद्देश्य किसी ठेकेदार को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि शहर के विकास कार्यों को समय पर पूरा करवाना है। मेयर पदमजीत सिंह मेहता के अनुसार, नगर निगम की ओर से पहले करीब 3.96 करोड़ रुपये के विकास कार्य फेयरडील कंस्ट्रक्शन और सरां कंस्ट्रक्शन को दिए गए थे। इन कार्यों में कथित तौर पर 350 से 400 दिन तक की देरी हुई।
विकास कामों में देरी
मेयर ने दावा किया कि इन कार्यों के लिए निगम को करीब 5.33 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा, जिससे निगम पर लगभग 1.36 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा। उन्होंने कहा कि करीब 20 विकास कार्यों में देरी का सीधा असर शहरवासियों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ा।
ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की बात
मेयर के मुताबिक, विकास कार्यों में देरी को देखते हुए नगर निगम ने फेयरडील कंस्ट्रक्शन और सरां कंस्ट्रक्शन को ब्लैकलिस्ट किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी विकास कार्यों को निर्धारित समय और नियमों के अनुसार पूरा करना जरूरी है।
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मेयर ने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती और नियमों का उल्लंघन होने पर निगम की ओर से कार्रवाई की जाएगी।

5.32 करोड़ का टेंडर दो बार रहा खाली
मेयर ने बताया कि प्रीमिक्स कार्यों के लिए करीब 5.32 करोड़ रुपये का टेंडर दो बार जारी किया गया, लेकिन दोनों बार किसी ठेकेदार ने बोली में हिस्सा नहीं लिया। इसके बाद निगम की ओर से शहर की सड़कों के व्यापक निर्माण और नवीनीकरण के लिए करीब 32 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया।
उनके अनुसार, इस टेंडर में निगम को 8.8 प्रतिशत कम दर प्राप्त हुई, जिससे करीब 2.79 करोड़ रुपये की बचत होने का दावा किया गया है। मेयर ने कहा कि इससे पहले के टेंडरों में अधिकतम करीब 2.5 प्रतिशत तक ही डिस्काउंट मिलने की स्थिति रही थी।
छोटे ठेकेदारों को बाहर करने के आरोप पर क्या बोले मेयर?
टेंडर प्रक्रिया में छोटे ठेकेदारों को बाहर किए जाने के आरोपों पर मेयर ने इसे गलतफहमी बताया। उनके अनुसार, ठेकेदारों के साथ बैठक कर उनकी आपत्तियों और सवालों पर चर्चा की गई।
मेयर ने कहा कि बैठक के बाद टेंडर प्रक्रिया को लेकर कई गलतफहमियां दूर हुईं। बैठक में शामिल ठेकेदारों की ओर से भी बातचीत के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात कही गई।
1.36 करोड़ के नुकसान के आंकड़े पर सवाल
प्रेसवार्ता के दौरान सामने रखे गए आंकड़ों को लेकर गणित पर भी सवाल उठे। 5.33 करोड़ रुपये में से 3.96 करोड़ रुपये घटाने पर करीब 1.37 करोड़ रुपये की राशि बनती है। ऐसे में 1.36 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आर्थिक भार का आंकड़ा किस आधार पर तय किया गया, इस बारे में निगम की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
'जनता के पैसे की बर्बादी स्वीकार नहीं'
मेयर पदमजीत सिंह मेहता ने कहा कि नगर निगम को मिलने वाला पैसा बठिंडा के लोगों का है और इसके इस्तेमाल में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि निगम का उद्देश्य किसी व्यापारी या ठेकेदार को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन विकास कार्यों में देरी या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी।
सड़कों का होगा काम
मेयर के मुताबिक, करीब 32 करोड़ रुपये के प्रीमिक्स टेंडर के तहत बठिंडा शहर की विभिन्न सड़कों के निर्माण और नवीनीकरण का काम करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया को लेकर किसी भी पक्ष को संदेह है तो संबंधित एजेंसी से इसकी जांच करवाने के लिए नगर निगम तैयार है।