डेली संवाद, नई दिल्ली। AI: कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी Artificial Intelligence (AI) आधुनिक दौर की सबसे तेजी से विकसित हो रही तकनीकों में शामिल है। स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान, उद्योग और रोजमर्रा के कामों में AI ने कई ऐसे बदलाव किए हैं, जिनसे काम की गति और उत्पादकता बढ़ी है। लेकिन जैसे-जैसे AI सिस्टम अधिक सक्षम और स्वायत्त होते जा रहे हैं, इनके संभावित जोखिमों को लेकर दुनिया भर के विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ रही है।
AI के बढ़ते प्रभाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भविष्य में AI सिस्टम इंसानी निर्देशों से आगे बढ़कर अधिक स्वायत्त तरीके से निर्णय लेने लगें, तो उन्हें नियंत्रित करना कितना मुश्किल होगा?
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ जोखिम भी बढ़े
AI का इस्तेमाल बीमारी की पहचान, मेडिकल रिसर्च, डेटा विश्लेषण, शिक्षा, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही AI के गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं।
2026 में MIT Sloan द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में 37 देशों के 272 AI विशेषज्ञों से 2025 से 2030 के बीच AI से जुड़े 24 जोखिमों का आकलन कराया गया। अध्ययन में खतरनाक AI क्षमताओं, AI आधारित हथियारों और साइबर हमलों, शक्ति के केंद्रीकरण तथा गलत या भ्रामक जानकारी के प्रसार जैसे जोखिमों को गंभीर चिंता के क्षेत्रों में शामिल किया गया।
AI के इंसानी नियंत्रण से बाहर होने की चिंता
AI को लेकर सबसे बड़ी चिंताओं में से एक इसकी बढ़ती autonomy यानी स्वायत्तता है। आज के कई AI सिस्टम दिए गए निर्देशों के आधार पर जटिल कार्य कर सकते हैं। भविष्य में अधिक उन्नत सिस्टम कितनी स्वतंत्रता के साथ निर्णय ले सकेंगे और उन पर मानव नियंत्रण किस स्तर पर रहेगा, यह AI governance के सामने महत्वपूर्ण सवाल है।
विशेषज्ञों के बीच AGI (Artificial General Intelligence) और आगे चलकर ASI (Artificial Superintelligence) जैसे संभावित विकास चरणों को लेकर भी चर्चा होती रही है। AGI का अर्थ ऐसी AI से है जो विभिन्न प्रकार के बौद्धिक कार्य इंसानों के समान स्तर पर कर सके, जबकि ASI की अवधारणा मानव से आगे की सामान्य बुद्धिमत्ता वाले सिस्टम से जुड़ी है। हालांकि, ये अभी विकास और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विषय हैं और इनके वास्तविक स्वरूप तथा समय-सीमा को लेकर विशेषज्ञों में निश्चितता नहीं है।
2030 तक करोड़ों नौकरियों पर असर?
AI और automation के रोजगार पर प्रभाव को लेकर भी लंबे समय से बहस जारी है। McKinsey के एक वैश्विक मॉडल के अनुसार 2016 से 2030 के बीच automation के कारण उसके मध्य परिदृश्य में लगभग 400 मिलियन श्रमिकों के बराबर काम प्रभावित या विस्थापित हो सकता है। तेज adoption scenario में यह आंकड़ा 800 मिलियन तक पहुंच सकता है।
हालांकि उसी शोध में नई आर्थिक गतिविधियों और उत्पादकता के कारण 555 मिलियन से 890 मिलियन तक नई नौकरियों की संभावित मांग का भी अनुमान लगाया गया था। इसलिए इन आंकड़ों को सीधे “इतनी नौकरियां खत्म होंगी” के रूप में पढ़ना सही नहीं होगा। नए दौर में कई नौकरियों की प्रकृति बदलने और कर्मचारियों को नई skills सीखने की जरूरत बढ़ने की संभावना है।
साइबर हमले और खतरनाक क्षमताएं
AI के गलत इस्तेमाल का एक बड़ा क्षेत्र साइबर सुरक्षा है। AI की coding, pattern recognition और information synthesis जैसी क्षमताएं साइबर हमलों को अधिक तेज और प्रभावी बनाने में इस्तेमाल की जा सकती हैं।
MIT Sloan के 2026 अध्ययन में विशेषज्ञों ने AI-enabled weapons और cyberattacks समेत mass-harm capabilities के लिए 12 प्रतिशत catastrophic-outcome probability का अनुमान लगाया। इसी अध्ययन में AI systems के dangerous capabilities वाले जोखिम के लिए भी 12 प्रतिशत का अनुमान सामने आया। अध्ययन में यह भी बताया गया कि AI का दुरुपयोग hacking, surveillance, deepfakes और कुछ खतरनाक तकनीकी गतिविधियों को आसान बना सकता है।
Deepfake और गलत जानकारी भी बड़ी चुनौती
AI के जरिए फोटो, वीडियो और ऑडियो को वास्तविक जैसा बनाया जा सकता है। इससे deepfake और misinformation का खतरा बढ़ता है। Forbes Advisor के एक सर्वे में 76 प्रतिशत अमेरिकी उपभोक्ताओं ने AI से उत्पन्न misinformation को लेकर चिंता जताई थी।
यह सर्वे 2,000 employed Americans पर आधारित था, इसलिए इसके आंकड़ों को पूरी दुनिया की आबादी का प्रतिनिधि नहीं माना जाना चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में किसी व्यक्ति के नाम से AI-generated वीडियो या ऑडियो तैयार कर उसे वायरल करना सार्वजनिक भ्रम और विश्वास के संकट को बढ़ा सकता है।
AI: वरदान या अभिशाप?
AI अपने आप में न तो केवल वरदान है और न ही निश्चित रूप से अभिशाप। इसका प्रभाव इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगा कि इसे किस उद्देश्य से, कितनी पारदर्शिता के साथ और किस तरह के सुरक्षा नियमों के तहत इस्तेमाल किया जाता है।
AI स्वास्थ्य, शिक्षा और विज्ञान में बड़े अवसर पैदा कर सकता है, लेकिन साइबर हमले, गलत सूचना, रोजगार में बदलाव, शक्ति के केंद्रीकरण और संभावित स्वायत्त खतरों जैसे मुद्दों पर प्रभावी governance की जरूरत बनी हुई है।
आने वाले वर्षों में AI की क्षमता बढ़ने के साथ सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल यह नहीं होगा कि “AI क्या कर सकता है?”, बल्कि यह भी होगा कि “AI को क्या करने की अनुमति दी जानी चाहिए और उस पर अंतिम नियंत्रण किसका होगा?”