डेली संवाद, अमृतसर/अजनाला। Punjab News: पंजाब में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की कथित साजिश की जांच में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला चार अक्टूबर को अजनाला क्षेत्र में ड्यूटी से घर लौट रहे एएसआई सुखचैन सिंह पर गोली चलाने से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान इस हमले के तार पाकिस्तान स्थित आईएसआई के कथित हैंडलरों से जुड़ने के संकेत मिले हैं।
इसके साथ ही मार्च 2026 में थाना भिंडी सैदां क्षेत्र में हुए ग्रेनेड हमले की घटना भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस का दावा है कि पंजाब में दहशत फैलाने और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने के लिए आरोपियों को दस लाख रुपये देने का लालच दिया गया था। मामले में चौथे आरोपी की तलाश जारी है।
घर से महज 200 मीटर पहले एएसआई पर चलाई गोली
पुलिस के अनुसार, चार अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:15 बजे जीआरपी अमृतसर में तैनात एएसआई सुखचैन सिंह ड्यूटी से लौट रहे थे। वह अपने गांव जगदेव खुर्द में घर से करीब 200 मीटर दूर थे, तभी मोटरसाइकिल सवार तीन युवकों ने उनका पीछा किया। आरोप है कि इनमें से एक युवक ने पिस्तौल से उन पर गोली चला दी।
गोली उनकी बाईं बांह में लगी, जिससे वह घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए अजनाला के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पांच अक्टूबर को थाना अजनाला में संबंधित धाराओं तथा शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने हमलावरों की पहचान करने और वारदात के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए जांच आगे बढ़ाई।
मार्च के ग्रेनेड हमले से जुड़े तार, जेल में बंद आरोपी भी गिरफ्तार
विशेष जांच टीम के अनुसार, पूछताछ के दौरान मार्च 2026 में थाना भिंडी सैदां क्षेत्र में हुए ग्रेनेड हमले के मामले की कड़ी भी सामने आई। उस मामले में गिरफ्तार बलजीत सिंह पुत्र मेवा सिंह, निवासी चक्क डोगरां, गोइंदवाल साहिब की केंद्रीय जेल में बंद था।
पुलिस का आरोप है कि जेल में रहते हुए बलजीत सिंह ने मोबाइल फोन के माध्यम से पाकिस्तान स्थित आईएसआई के कथित हैंडलरों से दोबारा संपर्क स्थापित किया। जांच के अनुसार, इसके बाद पंजाब में दहशत फैलाने और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने के उद्देश्य से कुछ लोगों को साथ जोड़ा गया। पुलिस का दावा है कि इस कथित योजना को अंजाम देने के लिए दस लाख रुपये देने का लालच दिया गया था।
हालांकि, पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से संपर्क, रुपये देने के कथित प्रस्ताव और मार्च के ग्रेनेड हमले से इस वारदात के संबंधों की स्वतंत्र पुष्टि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होनी बाकी है।
मोटरसाइकिल पर सवार होकर पहुंचे थे तीनों आरोपी
पुलिस के मुताबिक, वारदात के समय मोटरसाइकिल सिमरजीत सिंह उर्फ सिमर चला रहा था। बीच में बलजीत सिंह पुत्र बब्बन सिंह बैठा था, जबकि पीछे साहिब सिंह सवार था। आरोप है कि साहिब सिंह ने एएसआई सुखचैन सिंह पर गोली चलाई।
पुलिस ने सिमरजीत सिंह उर्फ सिमर और साहिब सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मार्च के ग्रेनेड हमले के मामले में गोइंदवाल साहिब जेल में बंद बलजीत सिंह पुत्र मेवा सिंह को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर इस मामले में गिरफ्तार किया गया। इस तरह पुलिस अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
चौथे आरोपी बलजीत सिंह पुत्र बब्बन सिंह, निवासी गुलगढ़, की गिरफ्तारी अभी बाकी है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि कथित साजिश में उसकी क्या भूमिका थी और वारदात को अंजाम देने में किन अन्य लोगों ने मदद की।
पुलिस से हाथापाई के बाद भागने की कोशिश, पैर में लगी गोली
मामले में 12 अक्टूबर को उस समय नया घटनाक्रम सामने आया, जब पुलिस टीम गिरफ्तार आरोपी साहिब सिंह को वारदात से जुड़े तथ्यों की पुष्टि के लिए घटनास्थल पर ले जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान साहिब सिंह ने कथित तौर पर पुलिस को चकमा देकर भागने की कोशिश की। आरोप है कि उसने पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की और थाना अजनाला के प्रभारी मनदीप सिंह का सर्विस रिवॉल्वर छीनकर उन पर हमला करने का प्रयास किया।
पुलिस का कहना है कि इस दौरान गोली चली, जो पुलिस के वाहन की छत और आरोपी के पैर में लगी। पैर में गोली लगने के कारण साहिब सिंह भाग नहीं सका। उसे उपचार के लिए अजनाला के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इस घटनाक्रम के दौरान गोली चलने की परिस्थितियों और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी पुलिस जांच के आधार पर सामने आएगी।
जेल में मोबाइल फोन की बरामदगी भी जांच का हिस्सा
पुलिस के मुताबिक, केंद्रीय जेल गोइंदवाल साहिब में बंद बलजीत सिंह पुत्र मेवा सिंह की तलाशी के दौरान एक मोबाइल फोन बरामद किया गया था। इस संबंध में जेल प्रशासन की ओर से अलग से आपराधिक कार्रवाई दर्ज की गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल किन लोगों से संपर्क करने के लिए किया गया था और क्या उसका संबंध एएसआई पर हमले की कथित साजिश से था। इसके अलावा गिरफ्तार आरोपियों के आपसी संपर्कों, संभावित सहयोगियों और विदेशी हैंडलरों से कथित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
साजिश के पीछे का मकसद और नेटवर्क खंगाल रही पुलिस
अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। जांच में अब यह पता लगाने पर जोर है कि एएसआई को निशाना बनाने के पीछे क्या मकसद था, कथित साजिश में कितने लोग शामिल थे और दस लाख रुपये देने के दावे के पीछे क्या साक्ष्य हैं। मार्च में हुए ग्रेनेड हमले और अक्टूबर में एएसआई पर गोली चलाने की घटना के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल तीन आरोपी गिरफ्तार हैं और चौथे आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से कथित संपर्क और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की योजना से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप भी न्यायिक प्रक्रिया में साबित होने बाकी हैं।