डेली संवाद, नई दिल्ली। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) के टर्मिनल-3 पर दिल्ली कस्टम्स (एयरपोर्ट एंड जनरल) ने नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। 6 अक्टूबर 2026 को बैंकॉक से एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2335 से पहुंचे एक भारतीय यात्री को प्रोफाइलिंग के आधार पर रोका गया।
कस्टम्स अधिकारियों ने यात्री को ग्रीन चैनल पर डायवर्ट किया। उसके मेटैलिक सिल्वर ट्रॉली बैग की विस्तृत जांच में 13 पॉलीथीन पाउच मिले, जिनमें संदिग्ध गांजा/मारिजुआना भरा हुआ था। कुल नेट वजन 12,859.5 ग्राम (लगभग 12.86 किलोग्राम) निकला, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 4.5 करोड़ रुपये बताया गया है।
यात्री को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंस (NDPS) Act, 1985 की धारा 43(B) के तहत गिरफ्तार किया गया। जब्त पदार्थ को धारा 43(A) के तहत सीज किया गया। इस मामले में धारा 8, 20, 23 और 29 के तहत केस दर्ज किया गया है। ये धाराएं प्रतिबंधित पदार्थों के उत्पादन, कब्जे, तस्करी और संबंधित अपराधों से जुड़ी हैं। आगे की जांच जारी है, जिसमें स्रोत और संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
यह कार्रवाई कस्टम्स की सतर्कता, रिस्क प्रोफाइलिंग और नियमित निरीक्षण की प्रभावशीलता को रेखांकित करती है। हवाई अड्डों पर नशीले पदार्थों की तस्करी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है और बैंकॉक जैसे रूट्स पर ऐसी कोशिशें बार-बार देखी गई हैं। दिल्ली कस्टम्स हाल के महीनों में भी कई समान जब्तियां कर चुका है और नशीले पदार्थों के विनाश अभियान भी चलाता रहा है।
सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के तहत ऐसी कार्रवाइयां समाज को नशे के खतरे से बचाने में मदद करती हैं। बड़ी मात्रा में गांजा जब्त होने से न केवल अवैध आपूर्ति बाधित होती है, बल्कि युवाओं और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम करने में सहायता मिलती है। कस्टम्स विभाग यात्रियों से अपील करता है कि वे कानून का पालन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें।
इस घटना से स्पष्ट होता है कि सीमा सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं और तस्करों की हर कोशिश नाकाम करने के लिए तैयार हैं। जांच के नतीजे आने के बाद मामले की और जानकारी सामने आ सकती है। ऐसी जब्तियां न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करती हैं, बल्कि नशे के खिलाफ लड़ाई में जन-जागरूकता भी बढ़ाती हैं।