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Tirupati Accident: तिरुपति बालाजी मंदिर में भगदड़, 6 की मौत; कई घायल

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डेली संवाद, आंध्र प्रदेश/तिरुपति। Tirupati Accident: आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के श्री तिरुपति मंदिर (Tirupati Balaji Temple) में बुधवार देर रात 9:30 बजे वैकुंठ द्वार दर्शन टिकट काउंटर के पास भगदड़ मच गई थी। हादसे में एक महिला समेत 6 लोगों की मौत हो गई और 40 लोग घायल हो गए हैं।

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दरअसल शुक्रवार से शुरू होने वाले 10 दिवसीय विशेष वैकुंठ द्वार दर्शनम के लिए टिकट बांटे जा रहे थे। मंदिर कमेटी ने 91 काउंटर खोले थे। इनमें करीब 4 हजार की भीड़ थी।

People climbed over each other during the stampede.
People climbed over each other during the stampede.

लोग अंदर घुसने लगे

इसी दौरान लाइन में लगी एक महिला बेहोश हो गई। इलाज के लिए उसे गेट खोलकर निकाला गया। इस दौरान लोग अंदर घुसने लगे। भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। जिसमें बीमार महिला की भी मौत हो गई।

पद्मावती मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर कुमार ने कहा, भगदड़ में कुछ लोगों को फ्रैक्चर हुआ है। बाकी के शरीर में चोटों आई हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू आज दोपहर 12 बजे तिरुपति पहुंचेंगे। वे करीब 3 घंटे यहां रहेंगे। घायलों से मिलेंगे।

Tirupati Balaji Temple
Tirupati Balaji Temple

जिस द्वार पर हादसा हुआ, उसे 10 जनवरी को खोला जाना था

एक दिन पहले मंगलवार को तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के कार्यकारी अधिकारी जे श्यामला राव ने बताया था कि 10 से 19 जनवरी तक वैकुंठ एकादशी पर वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए खोले जाने थे।

सुबह 4.30 बजे से प्रोटोकॉल दर्शन से शुरू होगा, उसके बाद सुबह 8 बजे से सर्व दर्शन शुरू होगा। इसके लिए लोग टोकन लेने के लिए लाइन में लगे थे। इन 10 दिनों में करीब 7 लाख भक्तों के आने की संभावना है।

People helping the woman after she got injured.
People helping the woman after she got injured.

तिरुपति भारत का सबसे प्रसिद्ध मंदिर

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और अमीर तीर्थस्थलों में से एक है। ये आंध्र प्रदेश के सेशाचलम पर्वत पर बसा है। भगवान वेंकटेश्वर के इस मंदिर का निर्माण राजा तोंडमन ने करवाया था। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 11वीं सदी में रामानुजाचार्य ने की थी।

मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर जब पद्मावती से अपना विवाह रचा रहे थे तो उन्होंने धन के देवता कुबेर से कर्ज लिया। भगवान पर अब भी वो कर्ज है और श्रद्धालु इसका ब्याज चुकाने में उनकी मदद करने के लिए दान देते हैं। तिरुमाला मंदिर को हर साल लगभग एक टन सोना दान में मिलता है।