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GST Bogus Billing Scam: पुलिस ने किया 128 करोड़ के फर्जी GST बिलिंग रैकेट का भंडाफोड़, कारोबारी समेत 6 लोग गिरफ्तार

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डेली संवाद, नई दिल्ली। GST Bogus Billing Scam News: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक बड़े GST फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करते हुए करीब 128 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने कुल 6 अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर 250 से अधिक शैल कंपनियों के जरिए फर्जी इनवॉइस बनाकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और नकद लेन-देन की हेराफेरी कर रहे थे। इनके तार उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में फैले हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम पर जीएसटी (GST) इनवॉइस जारी करते थे, जिससे बिना वास्तविक व्यापार के ही भारी मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत लाभ उठाया जा रहा था। इस फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। [caption id="attachment_85127" align="aligncenter" width="1200"] GST Raid GST Raid[/caption]

रैकेट के बारे में अहम सुराग

दिल्ली पुलिस की EOW टीम को तकनीकी सर्विलांस और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच के दौरान इस रैकेट के बारे में अहम सुराग मिले। जांच में सामने आया कि आरोपी डिजिटल माध्यमों और नकद लेन-देन दोनों का उपयोग करके पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने रणनीति बनाकर दरियागंज इलाके में छापेमारी की।

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दिल्ली पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली निवासी मास्टरमाइंड राजकुमार दीक्षित (43), गाजियाबाद के वसुंधरा निवासी विभाष मित्रा (34), मथुरा निवासी अमर (35), दिल्ली निवासी नितिन वर्मा (43), मो. वसीम (30) व आबिद (35) को भी दबोचा गया है। एक अन्य मुख्य आरोपी दिलीप कुमार फरार है। [caption id="attachment_111008" align="aligncenter" width="1200"] GST Bogus Billing Scam GST Bogus Billing Scam[/caption]

पुलिस ने मारा छापा

छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई। इसमें करीब 51.12 लाख रुपये नकद, 15 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 2 कार और कई फर्जी कंपनियों से जुड़े इनवॉइस और दस्तावेज शामिल हैं। इन दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी विभिन्न शैल कंपनियों के नाम पर फर्जी बिलिंग कर रहे थे और इस पूरे सिस्टम के जरिए टैक्स चोरी को अंजाम दिया जा रहा था।

ऐसे होता था खेल

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे फर्जी कंपनियां बनाकर बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के नकली बिल तैयार करते थे। फिर बैंकिंग चैनलों के जरिए लेनदेन को वैध दिखाया जाता था। इन फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का कारोबार दर्शाकर जीएसटी रिटर्न दाखिल किए जाते और आईटीसी के नाम पर सरकारी खजाने से रकम हासिल कर ली जाती थी। जीएसटी बिलों में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड नौवीं कक्षा तक पढ़ा राजकुमार दीक्षित अब तक 250 से अधिक शेल कंपनियां रजिस्टर्ड करा चुका है। फिलहाल एक कंपनी की जांच में ही करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुआ है।

कई राज्यों से जुड़े तार

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसके तार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से जुड़े हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पास कराया गया, जिसे आगे कैश में बदलकर आपस में बांटा जाता था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए आगे की जांच तेज कर दी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य सहयोगियों और फर्जी कंपनियों की पहचान की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

हो सकता है बड़ा खुलासा

पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस GST फ्रॉड रैकेट से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। आर्थिक अपराध शाखा ने स्पष्ट किया है कि ऐसे संगठित वित्तीय अपराधों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।