Punjab: पंजाब कांग्रेस में कभी भी हो सकता है बड़ा बदलाव! चन्नी होंगे प्रधान, सिंगला कार्यकारी प्रधान बनेंगे, विधानसभा चुनाव से पहले सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला तैयार
डेली संवाद, चंडीगढ़।
Punjab Congress New President Charanjit Singh Channi: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस हाईकमान ने राज्य में सत्ता वापसी के लिए सोशल इंजीनियरिंग का नया फॉर्मूला तैयार किया है। इसी रणनीति के तहत पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि इस प्रस्ताव पर पंजाब कांग्रेस के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं ने अपनी सहमति दे दी है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस फॉर्मूले को सिद्धांत रूप में हरी झंडी दे चुके हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। वहीं, विजय इंदर सिंगला कार्यकारी प्रधान बनाए जा सकते हैं।
सोशल इंजीनियरिंग से साधे जाएंगे अलग-अलग वोट बैंक
कांग्रेस इस बार केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर संगठन का पुनर्गठन करना चाहती है। पार्टी का मानना है कि यदि अलग-अलग वर्गों को संगठन में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए तो विधानसभा चुनाव में इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
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सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित फॉर्मूले में पूर्व मंत्री विजयइंदर सिंगला को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा को चुनाव संबंधी अहम कमेटियों की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
पंजाब में दलित वोट बैंक पर कांग्रेस की खास नजर
पंजाब देश का ऐसा राज्य है जहां दलित आबादी सबसे अधिक मानी जाती है। विभिन्न आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 32 प्रतिशत दलित मतदाता हैं। कांग्रेस का मानना है कि यदि दलित समुदाय के सबसे बड़े सिख चेहरे के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी को संगठन की कमान सौंपी जाती है तो पार्टी को बड़ा राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
चन्नी पहले भी पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में जालंधर लोकसभा सीट से सांसद हैं। कांग्रेस का आकलन है कि उनके नेतृत्व में दलित, गरीब और पारंपरिक कांग्रेस समर्थक मतदाताओं को दोबारा पार्टी के साथ जोड़ा जा सकता है।
शहरी और हिंदू वोटरों को भी साधने की तैयारी
कांग्रेस केवल दलित वोट बैंक पर ही नहीं बल्कि शहरी और हिंदू मतदाताओं पर भी विशेष फोकस कर रही है। पंजाब के लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला जैसे बड़े शहरों में सामान्य हिंदू और शहरी मतदाता कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
इसी कारण विजयइंदर सिंगला को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाने की चर्चा है ताकि शहरी और व्यापारिक वर्ग के साथ-साथ हिंदू मतदाताओं में भी सकारात्मक संदेश दिया जा सके।
जट्ट सिख नेतृत्व को भी मिलेगा महत्वपूर्ण रोल
कांग्रेस किसी भी वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती। यही वजह है कि संगठन में जट्ट सिख नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की तैयारी है।
सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा को कैंपेन कमेटी या कोऑर्डिनेशन कमेटी की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को मैनिफेस्टो कमेटी का प्रमुख बनाया जा सकता है। दोनों नेताओं की संगठन पर मजबूत पकड़ और चुनावी अनुभव का फायदा पार्टी उठाना चाहती है।
चन्नी पहले भी उठा चुके हैं प्रतिनिधित्व का मुद्दा
हाल ही में चंडीगढ़ में कांग्रेस के अनुसूचित जाति (SC) विंग की बैठक के दौरान चरणजीत सिंह चन्नी का एक बयान चर्चा का विषय बन गया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में उन्होंने संगठन में दलित नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था।
चन्नी ने कहा था कि जब राज्य में दलित आबादी बड़ी संख्या में है तो संगठन के प्रमुख पदों पर भी उन्हें उचित भागीदारी मिलनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस के अंदर संगठनात्मक बदलाव की चर्चाएं और तेज हो गई थीं।
2024 लोकसभा चुनाव से बढ़ा चन्नी का राजनीतिक कद
चरणजीत सिंह चन्नी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जालंधर सुरक्षित सीट से बड़ी जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की थी। कांग्रेस का मानना है कि यह जीत दर्शाती है कि चन्नी की लोकप्रियता अब भी बनी हुई है।
यही कारण है कि हाईकमान उन्हें विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी जिम्मेदारी देकर पूरे राज्य में कांग्रेस के अभियान का चेहरा बना सकता है।
2022 का प्रयोग क्यों नहीं चला?
कांग्रेस ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भी बड़ा दांव खेलते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था।
हालांकि उस समय पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। कांग्रेस केवल 18 सीटों पर सिमट गई थी और स्वयं चन्नी अपनी दोनों विधानसभा सीटों से चुनाव हार गए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उस समय चन्नी को बहुत कम समय मिला था। साथ ही पार्टी के अंदर गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेदों ने भी कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया।
इस बार क्या अलग है?
कांग्रेस का मानना है कि इस बार संगठन में समय रहते बदलाव कर चुनाव की तैयारी शुरू की जाएगी। पार्टी पहले संगठन को मजबूत करेगी और फिर पूरे राज्य में सामाजिक संतुलन के साथ चुनावी अभियान चलाएगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है तो कांग्रेस चार प्रमुख दलों में इकलौती ऐसी पार्टी होगी जिसकी कमान एक दलित नेता के हाथ में होगी। इससे दोआबा क्षेत्र समेत दलित बहुल इलाकों में कांग्रेस को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है।
कांग्रेस की रणनीति किसके खिलाफ?
पंजाब की राजनीति में इस समय आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस का नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला AAP, भाजपा और अकाली दल की मौजूदा रणनीतियों से अलग दिखाई देता है। पार्टी दलित, जट्ट सिख, शहरी और हिंदू मतदाताओं के बीच संतुलन बनाकर व्यापक सामाजिक गठजोड़ तैयार करना चाहती है।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल कांग्रेस की ओर से पंजाब संगठन में किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि पार्टी सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है। यदि ऐसा होता है तो पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की राजनीति में यह सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा।