Skip to content

Himachal Pradesh Weather: हिमाचल में भारी तबाही, किन्नौर में बाढ़ और मलबे से शिमला-रिकांगपिओ NH समेत 49 सड़कें बंद, मूसलाधार बारिश का अलर्ट

Himachal Weather
Himachal Weather
Share Facebook X WhatsApp Telegram Email
View in ePaper
डेली संवाद, शिमला। Himachal Pradesh Weather: हिमाचल प्रदेश में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही किन्नौर जिले में तेज बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। शुक्रवार तड़के करीब चार बजे किन्नौर के चोलिंग क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के बाद बाढ़ जैसे हालात बन गए। पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया, जिससे सड़क का करीब 30 मीटर हिस्सा पूरी तरह प्रभावित हो गया। मलबा आने के कारण शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग कई घंटों तक बंद रहा। सुबह करीब 10 बजे तक यातायात बाधित रहा, जिसके बाद सड़क को बहाल करने का काम शुरू किया गया। इस दौरान वहां से गुजर रही दो कारें भी मलबे की चपेट में आ गईं। राहत की बात यह रही कि दोनों वाहन समय रहते रुक गए और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। [caption id="attachment_22654" align="aligncenter" width="1200"] Himachal Weather News Himachal Weather News[/caption]

आवाजाही बंद

वहीं, किन्नौर के रिब्बा क्षेत्र में भी बाढ़ आने से रिब्बा-कंडे संपर्क मार्ग पर मलबा जमा हो गया। इसके चलते यह सड़क वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें प्रभावित मार्गों को खोलने में जुटी हुई हैं।

यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा

मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान शिमला के जुब्बड़हट्टी में 44 मिलीमीटर, मंडी के बलद्वाड़ा में 32 मिलीमीटर, सराहन में 27 मिलीमीटर और बिलासपुर में 26 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। प्रदेश के कई इलाकों में दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी देखी गई। कुल्लू के भुंतर में अधिकतम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा, जबकि मनाली में 5.5 और मंडी में 5.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई।

12 जुलाई को भारी बारिश

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 5 जुलाई से हिमाचल प्रदेश में मानसून की गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई है। विभाग ने 12 जुलाई तक कई जिलों में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी मार्गों से दूर रहने की सलाह दी गई है। प्रदेश में जून माह के दौरान 64.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 36 प्रतिशत कम रही। वर्ष 1901 से अब तक जून में दर्ज यह 44वीं सबसे कम बारिश बताई जा रही है। हालांकि मानसून के प्रवेश के बाद पिछले तीन दिनों में बारिश ने तेजी पकड़ी है और प्रदेश में करीब 16 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है।

बादल फटने से तबाही

किन्नौर में तीन दिनों के दौरान 18.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 423 प्रतिशत अधिक है। बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन के कारण प्रदेश में अभी भी 49 सड़कें और तीन ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं।