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पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की नई साजिश! सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय युवाओं को बना रहे निशाना

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों पर सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को निशाना बनाने और फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से संपर्क स्थापित करने के आरोप हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की नई साजिश! सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय युवाओं को बना रहे निशाना
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डेली संवाद, अमृतसर। Pakistan Intelligence Agency: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां, आईएसआई और पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIOs) भारतीय युवाओं को अपने जाल में फंसाने और संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए लगातार नए डिजिटल तरीके अपना रही हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को प्रभावित करने और उनसे गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिशें की जा रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी एजेंसियां सोशल मीडिया पर ‘फर्जी प्रोफाइल’ और अलग-अलग पहचान के जरिए भारतीय युवाओं से संपर्क करती हैं। इनमें विशेष रूप से युवाओं को निशाना बनाकर दोस्ती और बातचीत के माध्यम से धीरे-धीरे संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता है।

सोशल मीडिया पर दोस्ती कर बनाते हैं भरोसा

पाकिस्तानी एजेंसियों से जुड़े लोग पहले सोशल मीडिया पर युवाओं से दोस्ती करते हैं। इसके बाद बातचीत के जरिए उनका भरोसा जीतने की कोशिश की जाती है। कई मामलों में युवाओं को लालच, भावनात्मक बातचीत या अन्य तरीकों से प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है।

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सुरक्षा एजेंसियों ने युवाओं को आगाह किया है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बातचीत करते समय सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के साथ निजी या संवेदनशील जानकारी साझा न करें।

‘हनीट्रैप’ और फर्जी पहचान का इस्तेमाल

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया नेटवर्क द्वारा युवाओं को फंसाने के लिए फर्जी पहचान और कथित हनीट्रैप जैसे तरीकों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिए पहले संपर्क स्थापित किया जाता है और बाद में संवेदनशील सूचनाएं हासिल करने की कोशिश की जाती है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि युवाओं को ऐसे संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट, मैसेज, लिंक और अनजान नंबरों से सावधान रहना चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी संबंधित सुरक्षा या पुलिस एजेंसी को देने की अपील की गई है।

सुरक्षा एजेंसियों की नजर ऐसे डिजिटल नेटवर्क पर बनी हुई है और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही है।