Skip to content

Jammu News: आईआईएम जम्मू के छात्रों में असंतोष भड़का, आंदोलन की तैयारी

Jammu News: आईआईएम जम्मू के छात्रों में असंतोष भड़का, आंदोलन की तैयारी
Share Facebook X WhatsApp Telegram Email
View in ePaper
डेली संवाद, जम्मू। Jammu News: राष्ट्रीय महत्व के एक प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान आईआईएम जम्मू में छात्रों के लिए लागू की गई नई उपस्थिति नीति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। छात्रों और संस्थान प्रबंधन के बीच तनातनी की स्थिति बनी हुई है। यह मुद्दा अब दिल्ली स्थित केंद्रीय उच्चतर शिक्षा मंत्रालय तक पहुंच चुका है। आईआईएम (IIM) जम्मू (Jammu) के छात्रों ने संस्थान की मनमानी के खिलाफ सरकार से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है और मांगें न माने जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। विवाद 2025-27 बैच के छात्रों के लिए जारी नये हैंडबुक को लेकर है जिसमें उपस्थिति के मानकों को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है।

लागू की गई नई उपस्थिति नीति

प्राप्त जानकारी के अनुसार आईआईएम जम्मू में 2025-27 बैच के छात्रों के लिए लागू की गई नई उपस्थिति नीति में छात्रों के लिए 100% उपस्थिति को अनिवार्य किया गया है। नई नीति में पूरे सत्र के दौरान एक भी कक्षा छूटने पर कठोर दंड का प्रावधान है जिसका सीधा प्रभाव छात्रों के परीक्षा परिणामों में दिखना तय है। यह नियम प्रथमदृष्ट्या अव्यावहारिक लगता है। छात्रों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नई उपस्थिति नीति तैयार करते वक्त उनके स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ अन्य सभी व्यावहारिक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया गया है। नया कानून छात्रों खास कर छात्राओं के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। छात्र-छात्राओं को अब आपात परिस्थितियों में भी कक्षाओं में आने के लिए मजबूर किया जा रहा है और छोटी-सी अनुपस्थिति पर भी अंकों में कटौती की जा रही है। छात्रों के अनुसार नया कानून न सिर्फ अव्यावहारिक है, बल्कि यह स्वास्थ्य और लैंगिक समानता की भी अनदेखी करता है। इसके कारण युवा छात्र-छात्राएँ तनाव, अपमान और निराशा से जूझने को मजबूर हैं।

कानून बना ग्रेड में कटौती का हथियार

छात्रों में असंतोष की शुरूआत उस घटना से हुई जब एक युवा एमबीए छात्रा को भयंकर पेट दर्द के बावजूद कक्षा में उपस्थित होने के लिए मजबूर होना पड़ा। मासिक धर्म के असहनीय दर्द के बावजूद उसे कक्षा में उपस्थित होना पड़ा। एक भी कक्षा या कार्यक्रम छोड़ने का सीधा मतलब है ग्रेड में कटौती होना। पीड़ित छात्रा ने अपना अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “मैं वहाँ पेट दर्द के कारण अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही थी। अंकों के नुकसान के डर से काँपते हुए दहशत में बैठी रही।” उसने बताया कि संस्थान की लगभग हर छात्रा को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। नए कानून से सिर्फ छात्राएं ही नहीं, छात्र भी परेशान हैं। यह आईआईएम जम्मू के छात्रों की हकीकत है, जहाँ उपस्थिति को सीखने का पैमाना नहीं, बल्कि दंड का हथियार बना दिया गया है। संस्थान प्रबंधन की बदले की कार्रवाई की आशंकाओं को देखते हुए पीड़ित छात्रा ने अपना नाम गुप्त रखने का अनुरोध किया है।

सिर पर लटकती हुई “तलवार” जैसा

उल्लेखनीय है कि आईआईएम जम्मू में शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण सुबह 8 बजे से रात 10 बजे के दौरान शॉर्ट नोटिस पर (व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से) किसी भी दिन यहाँ तक कि राजपत्रित छुट्टियों में भी अतिरिक्त या प्रतिपूरक कक्षाएँ रख दी जाती हैं। यह छात्रों के लिए सिर पर लटकती हुई “तलवार” जैसा है। शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र भी कक्षा चूकने पर दंडित होते हैं। संस्थान रिकॉर्डेड लेक्चर उपलब्ध कराने का भी कोई प्रयास नहीं करता। एक छात्र ने तो यहां तक कहा, “हमें कुछ सबसे खराब शिक्षकों की कक्षाएँ न सुनने पर भी दंडित किया जाता है। फिर भी संस्थान इसे अनुशासन का नाम देता है।”

सवालों से बचने की कोशिश

जब छात्रों ने सरकार के सीपीग्राम्स (CPGRAMS) पोर्टल के माध्यम से इस संबंध में अपनी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई तो आईआईएम जम्मू के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी केसवन भास्करन की प्रतिक्रिया बेहद असंतोषजनक थी। उनकी ओर से यह जवाब दिया गया कि “आवासीय कार्यक्रमों में 100% उपस्थिति अपेक्षित है” और “चिकित्सकीय या पारिवारिक आपात स्थितियों में उचित विचार किया जाता है।” उन्होंने इसी संस्थान में इससे पहले लागू 80% उपस्थिति की परंपरा को छोड़ने का कोई कारण नहीं बताया। इस मामले को अब बंद कर दिया गया है। जब इस संवाददाता ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी से सीधा संपर्क कर उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। छात्रों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस रवैये की निंदा करते हुए इसे “गैर-वक्तव्य आदेश” (non-speaking order) बताया है। एक वकील ने कहा कि शिकायत निवारण प्रणाली को कारणयुक्त आदेश देना चाहिए।

नियम अन्य प्रबंधन संस्थानों से अलग

आईआईएम जम्मू का कानून अन्य प्रबंधन संस्थानों से बिल्कुल अलग है। उदाहरण के लिए, बिट्स पिलानी शून्य प्रतिशत उपस्थिति नीति का पालन करता है, इस विश्वास के साथ कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण स्वाभाविक रूप से छात्रों को कक्षा तक खींच लाएगा। वैश्विक स्तर पर अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों में उपस्थिति पर जोर तो दिया जाता है, लेकिन दंडस्वरूप ग्रेड में कटौती अत्यंत विशेष परिस्थितियों में ही की जाती है। लिवरपूल विश्वविद्यालय में उपस्थिति निगरानी को सहायता के साधन के रूप में देखा जाता है ताकि उन छात्रों की पहचान हो सके जिन्हें मदद की आवश्यकता है। इसी प्रकार, लैंकेस्टर विश्वविद्यालय में भी उपस्थिति को कल्याण से जोड़ा जाता है न कि दंड से। भारत में भी अधिकतर आईआईएम छात्र कल्याण पर ज़ोर देते हैं और स्वतः ग्रेड दंड से बचते हैं।

छात्रों में असंतोष

छात्र बढ़ते तनाव, चिंता और थकान की शिकायत कर रहे हैं। छात्राएँ विशेष रूप से प्रभावित महसूस करती हैं, क्योंकि सिर्फ मासिक धर्म से जुड़ी स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ही नहीं, पैनिक अटैक या मानसिक अवसाद जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को भी मान्य चिकित्सा अवकाश में शामिल नहीं किया गया है। एक छात्र ने कहा, “हमारे साथ मशीनों जैसा व्यवहार किया जाता है — बिना रुके, बिना कमजोरी और बिना गरिमा के काम करने की उम्मीद की जाती है।” कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कठोर नीतियाँ संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आनुपातिकता की कसौटी पर खरा नहीं उतरतीं जो जीवन और गरिमा के अधिकार की गारंटी देता है। उनके अनुसार लैंगिक-संवेदनशील प्रावधानों का अभाव अनुच्छेद 15 और सीईडीएडब्ल्यू (CEDAW) जैसे अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का भी उल्लंघन है।

विशेषाधिकार का दुरुपयोग

आईआईएम को स्वायत्तता इसलिए दी गई थी ताकि वे नवाचार के नये मानक स्थापित करें। लेकिन इस स्वायत्तता का इस्तेमाल अब मनमाने नियमों को थोपने के लिए किया जा रहा है जो विशेषाधिकार का दुरुपयोग है। एक छात्र के अनुसार, “हम यहाँ नेतृत्व सीखने आए थे, लेकिन हमें सिर्फ आज्ञा मानना सिखाया जा रहा है।” यह केवल एक कैंपस का मुद्दा नहीं है। भारत के शीर्ष संस्थानों को अनुशासन, गरिमा, स्वायत्तता, जवाबदेही और नियमों एवं करुणा के बीच संतुलन बनाना होगा। जब तक ऐसा नहीं होता, आईआईएम जम्मू की कक्षाएँ कठोरता का प्रतीक बनी रहेंगी और छात्र इसकी कीमत चुकाते रहेंगे।“

एमबीए स्टूडेंट हैंडबुक 2025-27 में क्या है ?

आईआईएम जम्मू में एमबीए के 2025–27 बैच के छात्र-छात्राओं के लिए जारी की गई पुस्तिका में 100% उपस्थिति अनिवार्य है। कानून के अनुच्छेद 9.1 और 9.2 के अनुसार, उपस्थिति इससे थोड़ा भी कम होने पर स्वतः शैक्षणिक ग्रेड दंड लागू होगा जो इस प्रकार है.. 80–100% उपस्थिति पर एक ग्रेड की कटौती, 70–80% पर दो ग्रेड की कटौती। 70% से कम उपस्थिति पर एक लेटर ग्रेड की कटौती चाहे छात्र का शैक्षणिक प्रदर्शन जैसा भी हो। चिकित्सकीय अवकाश केवल अस्पताल में भर्ती होने, संक्रामक रोग या दुर्घटना की स्थिति में ही मान्य है। सिरदर्द, चिंता, थकान या मासिक धर्म के दर्द जैसी आम और वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया गया है। परिवार में उत्पन्न हुई आपात स्थितियों के लिए तीन दिन की सीमा तो है, लेकिन दंड उन परिस्थितियों में भी लागू होगा।