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Punjab News: पंजाब के Ex CM चरणजीत सिंह चन्नी छोड़ रहे हैं राजनीति? कांग्रेस की भरी मीटिंग में कर दिया ये ऐलान, देखें VIDEO

Charanjit Singh Channi
Charanjit Singh Channi
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री व जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) अपनी ही कांग्रेस (Congress) पार्टी के नेताओं से काफी आहत हैं। उन्होंने कांग्रेस की भरी मीटिंग में राजनीति छोड़ने तक की धमकी दे डाली। चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि -मुझ पर तरह तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, मुझे टारगेट किया जा रहा है, इससे बढ़िया तो मैं घर बैठ जाता हूं। चन्नी के इस ऐलान के बाद कांग्रेसी नेता सकते में आ गए हैं। पंजाब (Punjab) कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) ने पार्टी की एक अहम बैठक में खुलकर नाराजगी जाहिर करते हुए यहां तक कह दिया कि अगर उन पर इसी तरह आरोप लगाए जाते रहे तो वह राजनीति छोड़कर घर बैठना बेहतर समझेंगे। उनके इस बयान से बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं में हड़कंप मच गया। [caption id="attachment_21405" align="aligncenter" width="800"] bhupesh baghel bhupesh baghel[/caption]

कांग्रेसी नेता सकते में

चरणजीत सिंह चन्नी के इस रवैये से पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल समेत सीनियर नेता सकते में आ गए। चन्नी ने पार्टी नेताओं को साफ कर दिया कि वो जो भी कर रहे, पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह बैठक पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और आने वाले चुनावों की रणनीति को लेकर बुलाई गई थी। बैठक में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel), प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग (Amrinder Singh Raja Warring), नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा (Pratap Singh Bajwa) समेत सभी विधायक, सांसद और जिले स्तर के नेता मौजूद थे।

मीटिंग में क्या बोले चन्नी, देखें VIDEO

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी में बढ़ रही गुटबाजी और आपसी मतभेदों को लेकर चन्नी को घेरने की कोशिश की। इस पर चन्नी नाराज हो गए और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन पर तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह जो भी कदम उठा रहे हैं, वह पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए उठा रहे हैं। ऐसे में यदि उनके प्रयासों को गलत तरीके से पेश किया जाएगा तो उनके लिए राजनीति में बने रहने का कोई मतलब नहीं रह जाता। [caption id="attachment_66301" align="aligncenter" width="800"] Charanjit Singh Channi Charanjit Singh Channi[/caption]

बघेल ने चन्नी को करवाया शांत

स्थिति को बिगड़ता देख प्रभारी भूपेश बघेल ने हस्तक्षेप किया और चन्नी को शांत करने की कोशिश की। बघेल ने स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी को टारगेट नहीं किया जा रहा है और सभी नेता संगठन को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करें। उनके हस्तक्षेप के बाद माहौल कुछ हद तक सामान्य हुआ। हालांकि, मामला यहीं नहीं थमा।

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सूत्रों के मुताबिक, जब चर्चा आगे बढ़ी तो प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने एक अहम सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि जितने भी मौजूदा सांसद हैं, उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इससे मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वतः विराम लग जाएगा और पार्टी एकजुट होकर चुनावी रणनीति बना सकेगी। वड़िंग का यह सुझाव सीधे तौर पर उन नेताओं पर असर डालता है जो सांसद भी हैं और भविष्य में मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जाते हैं। [caption id="attachment_91605" align="aligncenter" width="1200"] Amrinder Singh Raja Warring Amrinder Singh Raja Warring[/caption]

कांग्रेस में सीएम के कई दावेदार

बताया जा रहा है कि इस सुझाव पर बैठक में मौजूद कुछ नेताओं ने सहमति नहीं जताई। कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों की सूची लंबी मानी जा रही है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa), लुधियाना से सांसद और प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, फतेहगढ़ साहिब से सांसद अमर सिंह (Amar Singh) और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा शामिल हैं। इन नामों में बाजवा को छोड़कर अधिकांश नेता वर्तमान में लोकसभा सांसद हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और गुटबाजी पार्टी की चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सभी नेता एकजुट हैं और आगामी चुनावों में मजबूती से उतरेंगे। फिलहाल, चन्नी के बयान ने पंजाब (Punjab) कांग्रेस (Congress) की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को किस तरह संभालता है और क्या आने वाले समय में संगठनात्मक स्तर पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।