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UP News: सरकार की बड़ी कार्रवाई, 3 अफसरों को किया सस्पैंड, जाने वजह

UP News: सरकार की बड़ी कार्रवाई, 3 अफसरों को किया सस्पैंड, जाने वजह
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डेली संवाद, लखनऊ। UP News: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में सरकारी, आरक्षित और ग्रामसभा की भूमि से जुड़े मामलों में बड़ी प्रशासनिक गड़बड़ी सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ अधिकारियों ने अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई करने के बजाय कब्जेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने तीन पीसीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। ये तीनों अधिकारी पूर्व में चंदौली में तहसीलदार के पद पर तैनात रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश (UP) की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद तीनों अफसरों को सस्पैंड कर दिया गया। निलंबित किए गए अधिकारियों में तत्कालीन तहसीलदार सतीश कुमार (वर्तमान तैनाती: एसडीएम एटा), विराग पांडेय (वर्तमान तैनाती: एसडीएम गाजियाबाद) और लालता प्रसाद (वर्तमान तैनाती: एसडीएम बुलंदशहर) शामिल हैं। इन पर सार्वजनिक, आरक्षित और ग्रामसभा की भूमि को नुकसान पहुंचाने तथा अवैध कब्जेदारों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप हैं। [caption id="attachment_99444" align="aligncenter" width="1200"] CM Yogi Adityanath CM Yogi Adityanath[/caption]

कब्जेधारियों को पहुंचाया लाभ

दरअसल, चंदौली के जिलाधिकारी द्वारा पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर तहसील की पत्रावलियों का गहन निरीक्षण किया गया था। इस दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि जिन मामलों में पहले से ही अवैध कब्जा हटाने और वसूली के आदेश पारित हो चुके थे, उनमें बाद में वसूली के नोटिस वापस ले लिए गए। इससे कब्जेदारों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाया गया और सरकारी कार्रवाई को निष्प्रभावी कर दिया गया।

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इन मामलों में जिन जमीनों को नुकसान पहुंचाया गया, वे खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, नवीन परती, बंजर भूमि और अन्य लोक उपयोगिता से जुड़ी भूमि थीं। इन जमीनों का उपयोग आमजन के हित में होना था, लेकिन अधिकारियों की कथित लापरवाही और पक्षपातपूर्ण फैसलों के चलते सरकारी संपत्ति को भारी क्षति पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया।

अतिक्रमणकारियों के पक्ष में आदेश

इस समिति में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), उप जिलाधिकारी चकिया और अपर उप जिलाधिकारी चंदौली को शामिल किया गया। समिति की विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि तत्कालीन तहसीलदारों ने पीठासीन अधिकारी की हैसियत से अतिक्रमणकारियों के पक्ष में आदेश पारित किए। इससे न केवल कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति को भी बड़ा नुकसान हुआ। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर पर कार्रवाई करते हुए प्रमुख सचिव नियुक्ति एम. देवराज द्वारा आदेश जारी किया गया। आदेश में तीनों पीसीएस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस जांच के लिए वाराणसी के मंडलायुक्त को जांच अधिकारी नामित किया गया है, जबकि पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर के तहसीलदार को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया है। तीनों अधिकारियों को अलग-अलग आरोप पत्र जारी किए जाएंगे।

लखनऊ से संबद्ध किया

निलंबन अवधि के दौरान तीनों पीसीएस अधिकारियों को राजस्व परिषद, लखनऊ से संबद्ध किया गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और दोष सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, सरकार के इस कदम को सरकारी जमीनों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है।