डेली संवाद, नई दिल्ली।
Petrol Diesel Price: पश्चिम एशिया में शांति समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। इसका सीधा फायदा भारत की सरकारी तेल कंपनियों को मिलने लगा है। कच्चे तेल के सस्ता होने से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर होने वाला घाटा काफी कम हुआ है, जिससे आने वाले महीनों में इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी रिफाइनरियों और खुदरा ईंधन विक्रेताओं के पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर संयुक्त मार्जिन अब पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर से भी ऊपर पहुंच गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में की गई कटौती ने तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है।
7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी
जानकारी के अनुसार, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल थी, तब सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 23 रुपये और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा था। हालांकि, पिछले सप्ताह जारी रिपोर्ट में बताया गया कि पेट्रोल पर यह घाटा घटकर केवल 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है।
मई महीने में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बावजूद तेल कंपनियां लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही थीं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी पहले तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा था कि कंपनियां पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। उन्होंने बताया था कि कुल अंडर-रिकवरी करीब दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
राहत मिलने की उम्मीद जताई
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में पहले से भंडारित महंगे कच्चे तेल के कारण तेल कंपनियों की आय पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, जुलाई-सितंबर तिमाही से स्थिति में सुधार की संभावना है। इसके बावजूद दो प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं। पहली, कंपनियों पर बढ़ता कर्ज, जो उनके मूल्यांकन और वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। दूसरी, ईंधन करों को लेकर बनी अनिश्चितता, जो भविष्य की कमाई पर असर डाल सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है, तो भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल), इंडियन ऑयल (आईओसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) में से बीपीसीएल और आईओसी को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। एलपीजी पर घाटा अभी भी ऊंचा बना हुआ है, लेकिन कच्चे तेल के सस्ता होने से इस क्षेत्र में भी राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।