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Birth and Death Registration: जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के नियम में बदलाव, लेट इंट्री नहीं, अगर देर हुई तो काटने होंगे कोर्ट के चक्कर

संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया। नए नियम लागू होने पर दो वर्ष से अधिक देरी से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी।

Birth and Death Registration: जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के नियम में बदलाव, लेट इंट्री नहीं, अगर देर हुई तो काटने होंगे कोर्ट के चक्कर
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डेली संवाद, नई दिल्ली। Birth and Death Registration Amendment Bill 2026: संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच लोकसभा ने शुक्रवार को जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 को बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया।

विपक्ष प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरता रहा, जिसके चलते प्रश्नकाल नहीं चल सका और दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

सरकार ने विपक्ष के शोर-शराबे के बीच विधेयक को सदन में पेश किया और ध्वनिमत से पारित करा लिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों से जवाब जरूर मांगेगी।

क्या है नए संशोधन में खास?

जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना तथा देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाना है।

नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

वर्तमान नियमों के तहत एक वर्ष से अधिक देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण कराया जा सकता है। हालांकि, संशोधन लागू होने के बाद यह व्यवस्था केवल एक वर्ष से दो वर्ष तक की देरी वाले मामलों में ही लागू रहेगी।

मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध

राज्यसभा में भी विपक्ष के विरोध के चलते कोई महत्वपूर्ण कामकाज नहीं हो सका। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्ष के लगातार हंगामे पर नाराजगी जताते हुए सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।

गौरतलब है कि मानसून सत्र के दौरान अब तक लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक भी संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं।

वहीं, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कानून में प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना और रिकॉर्ड प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।